"पहलगाम हमले के बाद 'पाकिस्तान जिंदाबाद' लिखने वाले आरोपी को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत"
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पहलगाम हमले के तुरंत बाद इंस्टाग्राम पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' पोस्ट करने के आरोपी को जमानत दे दी। इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। पुलिस ने इस मामले में आरोपी फैजान को एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। अपराध की प्रकृति और रिकॉर्ड में मौजूद चीजों को देखते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल-जज बेंच ने आरोपी फैजान को रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी फैजान के वकील एनआई जाफरी ने पक्ष रखा और बीएनएस के सेक्सन 152 का हवाला देते हुए कहा, "आरोपी ने भारत के लिए कोई अपमानजनक या बेइज्जती वाली बात पोस्ट नहीं की थी।"
ये भी पढ़ें कश्मीरी गेट में कार पर गोलीबारी, खुद को लॉरेंस बिश्नोई लीगल टीम का सदस्य बताने वाला एक व्यक्ति घायलतर्क दिया गया कि सिर्फ किसी दुश्मन देश का समर्थन करना ही सेक्शन 152 बीएनएस के दायरे में नहीं आता है। यह मामला सेक्शन 196 बीएनएस के तहत आ सकता है, जिसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट कर सकता है और जिसमें अधिक से अधिक तीन से पांच साल की सजा हो सकती है। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरोपी फैजान की जमानत याचिका का विरोध किया। पुलिस की दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी।
जस्टिस देशवाल ने निर्देश दिया कि आरोपी फैजान सोशल मीडिया पर कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड नहीं करेगा, जो देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा। हाईकोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करेगा, और रिहाई के बाद किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। आदेश में साफ किया गया कि शर्तों का कोई भी उल्लंघन होने की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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