शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, मेडिकल रिपोर्ट में बटुकों से 'कुकर्म' की पुष्टि; पीड़ित ने बयां की दर्दनाक दास्ताँ
दो डॉक्टरों के पैनल ने किया परीक्षण; शंकराचार्य का पलटवार— "हिस्ट्रीशीटर की कहानी पर हाय-दइया क्यों?" हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल
प्रयागराज (रॉयल बुलेटिन): ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध चल रहे यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि पीड़ित बटुकों के मेडिकल परीक्षण में कुकर्म की पुष्टि हुई है। दो डॉक्टरों के पैनल ने प्रयागराज के सरकारी अस्पताल में यह जांच की थी, जिसकी रिपोर्ट गुरुवार को बंद लिफाफे में जांच अधिकारी को सौंप दी गई। पुलिस अब इस रिपोर्ट को शुक्रवार को न्यायालय में पेश करेगी।
इस बीच, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया और अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ित ने दावा किया कि अध्ययन के लिए आश्रम जाने पर उसका और अन्य बच्चों का शोषण किया गया। पीड़ित ने सीधे तौर पर अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि माघ मेले के दौरान 16 जनवरी को भी उसके साथ घिनौना कृत्य किया गया। आरोप है कि शिष्य प्रकाश और अरविंद बाहर से बच्चे लाते थे, जिनका यौन शोषण किया जाता था।
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ये भी पढ़ें मुंबई में 25 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, कोलकाता से दिल्ली, गुजरात के रास्ते पहुंचे थे मुंबईइन गंभीर आरोपों और मेडिकल रिपोर्ट पर वाराणसी में प्रतिक्रिया देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक गहरी साजिश बताया। उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज को 'हिस्ट्रीशीटर' बताते हुए कहा कि पुलिस ने क्या उन्हें अपना प्रवक्ता बना लिया है जो वे रिपोर्ट की बातें सार्वजनिक कर रहे हैं? उन्होंने कहा, "हमें कोई खतरा नहीं है, हमने अपना पिंडदान पहले ही कर रखा है, चाहो तो अभी मार दो।" उन्होंने आरोप लगाया कि 'एपस्टीन फाइल' से ध्यान भटकाने के लिए जनता को शंकराचार्य की कहानी में उलझाया जा रहा है।
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मामला बढ़ता देख शंकराचार्य के वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इसी बीच, वकील के मोबाइल पर बुधवार रात धमकी भरा मैसेज आया, जिसमें वाराणसी कचहरी और उन्हें बम से उड़ने की बात कही गई है। प्रयागराज पुलिस पिछले चार दिनों से वाराणसी में डेरा डाले हुए है और किसी भी समय शंकराचार्य से पूछताछ कर सकती है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को माघ मेले में प्रशासन और शंकराचार्य के बीच झड़प से हुई थी। इसके बाद 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की सुस्ती देख मामला स्पेशल पॉक्सो कोर्ट पहुँचा, जहाँ 13 फरवरी को बच्चों को पेश किया गया। कोर्ट के कड़े रुख के बाद 21 फरवरी को झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई, जिसमें शंकराचार्य और उनके शिष्यों को आरोपी बनाया गया है।
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