‘केरल स्टोरी 2’ के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम, बोले- टीजर-ट्रेलर कुछ भी नहीं हटाया गया
नई दिल्ली। फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 – गोइज बियॉन्ड’ के निर्माताओं सनशाइन पिक्चर्स ने स्पष्ट किया है कि फिल्म के टीजर को हटाने या डिलीट करने की जो खबरें सोशल मीडिया और कुछ मीडिया हाउसों में चल रही हैं, वे पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और भ्रामक हैं। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मामला अभी केरल हाई कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट ने टीजर या ट्रेलर हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है। निर्माताओं ने जोर देकर कहा कि टीजर और ट्रेलर दोनों उनके सभी ऑफिशियल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध रहेंगे।
सनशाइन पिक्चर्स ने मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आम लोगों से अपील की है कि वे बिना तथ्यों की जांच किए अफवाहें या गलत रिपोर्ट न फैलाएं। कंपनी ने कहा कि ऐसी गलत सूचनाएं सिर्फ अनावश्यक भ्रम और विवाद पैदा करती हैं। यह स्पष्टीकरण केरल हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें गुरुवार को फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी किया गया। नोटिस एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने टीजर और ट्रेलर पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इनमें कई राज्यों की महिलाओं को प्रेम संबंधों के जरिए फंसाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने का चित्रण किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि कहानी कई राज्यों से जुड़ी होने के बावजूद फिल्म का टाइटल और प्रचार केवल केरल से जोड़कर आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और साजिश जैसी घटनाओं को दिखाया गया है। टीजर के अंत में हिंदी नारा “अब सहेंगे नहीं, लड़ेंगे” भी विवाद का कारण बना है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नारा प्रतिशोध की भावना जगाता है और सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएफसी ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5बी का पालन नहीं किया। इस धारा के तहत ऐसी फिल्मों को प्रमाणन नहीं मिलना चाहिए जो सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता के खिलाफ हों या अपराध के लिए उकसावे का काम करें। 30 जनवरी को टीजर जारी होने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था। इसमें तीन हिंदू लड़कियों (उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया) की कहानी दिखाई गई है, जिनके जीवन में प्रेम संबंधों के बाद धर्म परिवर्तन की साजिश का खुलासा होता है। टीजर में लड़कियां हिजाब पहने अपना दर्द बयां करती हैं और अंत में “अब सहेंगे नहीं… लड़ेंगे” का नारा सुनाई देता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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