'यादव जी की लव स्टोरी' के विरोध में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया सुनवाई से इनकार
नई दिल्ली। प्रगति तिवारी, विशाल मोहन, अंकित बढ़ाना और सुखविंदर विक्की स्टारर फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फिल्म के टाइटल और रिलीज पर रोक की मांग को लेकर याचिका दर्ज कराई गई थी। अब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, और कोर्ट का कहना है कि फिल्म के टाइटल से यादव समुदाय की छवि खराब नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में फिल्म के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि टाइटल के कुछ भी ऐसा विवादित नहीं है, जैसा 'घूसखोर पंडत' में था। ये मामला घूसखोर पंडत से अलग है।
ये भी पढ़ें अयोध्या में ‘रन फॉर राम 2026’ का भव्य समापन, हजारों धावकों ने दिखाई आस्था और फिटनेस की मिसालफिल्म के टाइटल से यादव समुदाय की छवि खराब नहीं होती है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी फिल्म का टाइटल मात्र इसलिए असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी समुदाय की छवि खराब होने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिल्म के रिलीज पर लटकी तलवार अब उतर चुकी है। फिल्म 27 फरवरी को यानी 2 दिन बाद सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के टाइटल में यादव जी और ट्रेलर में यादव समुदाय की लड़की का एक विशेष वर्ग के व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध की वजह से फिल्म का विरोध हो रहा है। यूपी के कई हिस्सों में फिल्म के विरोध में नारेबाजी की गई और फिल्म के पोस्टर भी जलाए गए थे।
यादव समुदाय का कहना है कि टाइटल और फिल्म की कहानी के जरिए यादव समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म के बैन की मांग उठ रही है और फिल्म के लीड किरदारों को भी टारगेट किया गया। फिल्म में लीड रोल प्ले कर रही प्रगति तिवारी ने भी फिल्म को लेकर सफाई पेश की थी कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जो किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाए। हालांकि अब कोर्ट के फैसले से साफ है कि फिल्म में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देते हुए रिलीज का आदेश पहले भी दे दिया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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