March farming crops: मार्च में करें इन 4 पारंपरिक फसलों की खेती कम लागत ज्यादा मुनाफा और मिट्टी भी बनेगी उपजाऊ
March farming crops: अगर आप किसान हैं और मार्च महीने में ऐसी फसल बोना चाहते हैं जिसमें लागत कम हो मेहनत कम लगे और मुनाफा अच्छा मिले तो यह जानकारी आपके बहुत काम आने वाली है। देश की जान हमारे किसान जैसे मंचों पर किसानों को सलाह दी जा रही है कि मार्च के महीने में चार पारंपरिक फसलें लगाकर शानदार कमाई की जा सकती है। खास बात यह है कि ये फसलें कम देखभाल में तैयार हो जाती हैं और जमीन की उर्वरता भी बढ़ाती हैं।
बाजरा की खेती से कम पानी में बेहतर उत्पादन
मार्च महीने में बाजरा की बुवाई पूरे महीने की जा सकती है। यह अनाज फसल कम पानी में भी अच्छी तरह तैयार हो जाती है। इसे लगभग तीन सिंचाई की जरूरत होती है और खाद भी बहुत ज्यादा नहीं डालनी पड़ती। एक एकड़ में करीब 12 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है जो किसानों के लिए अच्छा मुनाफा दे सकता है।
बाजरा की कुछ उन्नत किस्में जैसे Pioneer 86M1 Pioneer 86M2 Kaveri Seed KPS 6310 और Tata Dhanuka MP 7793 बेहतर उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। कम लागत और कम जोखिम के कारण बाजरा मार्च के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
तिल की गर्मियों वाली खेती से बीमारी का खतरा कम
तिल एक तिलहन फसल है जिसे 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच बोया जा सकता है। गर्मियों में इसकी खेती करने से फफूंद जनित रोगों का खतरा कम हो जाता है जो बरसात में ज्यादा देखने को मिलता है। एक एकड़ के लिए लगभग डेढ़ किलो बीज पर्याप्त होता है।
बाजार में तिल की अच्छी कीमत मिलती है जिससे किसान को सीधा फायदा होता है। कम बीज दर और कम देखभाल के कारण यह फसल भी मार्च के लिए फायदे का सौदा बन सकती है।
मूंग की फसल देती है जल्दी तैयार होकर पैसा
मूंग दलहन फसल है जो केवल 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी बुवाई भी 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच की जा सकती है। एक एकड़ में 6 से 10 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। कम समय में तैयार होने के कारण किसान इसे दूसरी फसल के साथ रोटेशन में भी लगा सकते हैं।
मूंग मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती है जिससे अगली फसल को भी फायदा मिलता है। यही वजह है कि यह फसल कमाई के साथ जमीन की सेहत भी सुधारती है।
उड़द की खेती भी देती है मजबूत मुनाफा
उड़द भी मूंग की तरह 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी बुवाई भी उसी अवधि में की जा सकती है। एक एकड़ के लिए करीब 10 से 12 किलो बीज की जरूरत होती है। दलहन फसल होने के कारण यह भी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
उड़द की बाजार में स्थिर मांग रहती है जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है। कम अवधि और कम लागत में तैयार होने के कारण यह भी मार्च के लिए बेहतरीन विकल्प है।
मिश्रित खेती से बढ़ेगा फायदा
अगर किसी किसान के पास चार एकड़ जमीन है तो वह एक एकड़ में बाजरा एक में तिल एक में मूंग और एक में उड़द लगा सकता है। इससे जोखिम कम होगा और अलग अलग फसलों से अलग अलग समय पर आमदनी मिलेगी। यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक साबित हो सकता है।
मार्च में इन चार पारंपरिक फसलों की खेती करके किसान कम लागत में अच्छी कमाई कर सकते हैं और साथ ही अपनी जमीन को भी मजबूत बना सकते हैं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां