लहसुन की फसल में जड़ गलन और फफूंद का खतरा, समय पर करें सही उपचार वरना घटेगी पैदावार, जानें पूरी वैज्ञानिक सलाह
अगर आपने अगेती लहसुन की खेती की है तो यह समय आपके लिए बेहद अहम है। कई जगहों पर लहसुन की फसल पककर तैयार हो चुकी है और बाजार में इसकी आवक भी बढ़ने लगी है। लेकिन जिन खेतों में बुवाई थोड़ी देर से हुई थी वहां इस समय जड़ गलन और फफूंद की समस्या तेजी से देखी जा रही है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है और कंद की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है।
लहसुन में जड़ गलन और फफूंद की पहचान कैसे करें
लहसुन की फसल में जड़ सड़न और फफूंद की समस्या धीरे धीरे शुरू होती है लेकिन असर गंभीर होता है। इस दौरान जड़ों का रंग भूरा या काला पड़ने लगता है। जड़ों की संख्या कम हो जाती है और पौधा कमजोर दिखने लगता है। यह संकेत है कि मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद कंद को नुकसान पहुंचा रही है।
अगर समय पर पहचान हो जाए तो इस समस्या को रोका जा सकता है और फसल को बचाया जा सकता है।
समस्या के मुख्य कारण क्या हैं
जड़ सड़न का सबसे बड़ा कारण मिट्टी में अधिक नमी और जलभराव है। जब खेत में ज्यादा पानी रुक जाता है तो फंगस तेजी से सक्रिय हो जाती है और जड़ों पर हमला करती है।
कभी कभी जमीन में मौजूद बारीक सफेद कीट भी जड़ों को काटकर कमजोर कर देते हैं। इससे फफूंद को हमला करने का मौका मिल जाता है। ऐसे में पौधे का विकास रुक जाता है और कंद छोटे रह जाते हैं।
जड़ सड़न और फफूंद का प्रभावी उपचार
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या के नियंत्रण के लिए Thiophanate Methyl 70 प्रतिशत WP का उपयोग किया जा सकता है। इसे लगभग पांच सौ ग्राम प्रति एकड़ की दर से खाद में मिलाकर या जड़ों के पास घोल बनाकर देना लाभकारी रहता है।
इसके अलावा Metalaxyl 35 प्रतिशत का भी उपयोग किया जा सकता है। यह फफूंद को नियंत्रित करने में मदद करता है और पौधे को दोबारा स्वस्थ होने का मौका देता है।
अगर जड़ों में बारीक कीट दिखाई दें तो Thiamethoxam 25 प्रतिशत WG का सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। इससे कीट नियंत्रण में आते हैं और फफूंद का असर कम होता है।
जड़ों के बेहतर विकास के लिए Humic 98 का प्रयोग लाभकारी माना जाता है। इससे बची हुई जड़ों का विकास तेज होता है और नई सफेद जड़ें निकलती हैं जिससे पौधा फिर से मजबूत बनता है।
इस समय पानी देने में रखें सावधानी
इस समय खेत में ज्यादा सिंचाई करना नुकसानदायक हो सकता है। अधिक नमी फफूंद को और बढ़ावा देती है। इसलिए जरूरत के अनुसार ही हल्की सिंचाई करें।
अगर संभव हो तो दवाओं का प्रयोग ड्रेंचिंग विधि से करें यानी पानी के साथ घोल बनाकर जड़ों के पास डालें। इससे दवा सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचती है और परिणाम जल्दी मिलता है।
समय पर देखभाल से बच सकती है पूरी फसल
लहसुन की फसल में जड़ गलन और फफूंद की समस्या गंभीर जरूर है लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर अच्छी गुणवत्ता की फसल और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
अगर अभी ध्यान दे दिया जाए तो कंद अच्छी तरह विकसित होंगे और बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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