ईडी समन मामले में अमानतुल्लाह खान को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी
नई दिल्ली। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की भर्ती से जुड़े मनी लांड्रिंग से जुड़े समन को नजरअंदाज करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान को बरी कर दिया है। एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने बरी करने का आदेश दिया।
ईडी ने याचिका दायर कर कहा था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की भर्ती में गड़बड़ियों से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए अमानतुल्लाह खान को मनी लांड्रिंग कानून की धारा 50 के तहत समन जारी किया गया था लेकिन वो पेश नहीं हुए।
ईडी ने कहा है कि अमानतुल्लाह खान जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ईडी के मुताबिक अमानतुल्लाह खान ने आपराधिक गतिविधियों से काफी संपत्ति अर्जित की औऱ अपने सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदी है। ईडी के मुताबिक छापे के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य ऐसे मिले हैं जिनसे पता चलता है कि वो मनी लाउंड्रिंग के अपराध में लिप्त हैं।
इस मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट, ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले चुकी है। ईडी ने 9 जनवरी, 2024 को चार्जशीट दाखिल किया था । करीब 5000 पेजों की चार्जशीट में ईडी ने जिन लोगों को आरोपित बनाया है उनमें जावेद इमाम सिद्दीकी, दाऊद नासिर, कौसर इमाम सिद्दीकी और जीशान हैदर को आरोपी बनाया है।
ईडी ने पार्टनरशिप फर्म स्काई पावर को भी आरोपी बनाया है। ईडी के मुताबिक ये मामला 13 करोड़ 40 लाख की जमीन की बिक्री से जुड़ा हुआ है। ईडी के मुताबिक अमानतुल्लाह खान के अज्ञात स्रोतों से अर्जित संपत्ति से जमीनें खरीदी और बेची गई। आरोपित कौसर इमाम सिद्दीकी की डायरी में 8 करोड़ की एंट्री की गई है। जावेद इमाम को ये संपत्ति सेल डीड के जरिए मिली। जावेद इमाम ने ये संपत्ति 13 करोड़ 40 लाख में बेची। जीशान हैदर ने इसके लिए जावेद को नकद राशि दी।
इस मामले में पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने केस दर्ज किया था। सीबीआई की ओर से दर्ज केस में आप विधायक अमानतुल्लाह खान समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। सीबीआई ने अमानतुल्लाह खान के अलावा जिन आरोपितों को आरोपी बनाया है। सीबीआई ने इस मामले में 23 नवंबर, 2016 को एफआईआर दर्ज किया था। जांच के बाद सीबीआई ने 21 अगस्त, 2022 को चार्जशीट दाखिल किया था। सीबीआई के मुताबिक दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ और संविदा पर दूसरी नियुक्तियों में गड़बड़ियां की गई।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
