मुजफ्फरनगर में 'सिस्टम' का सितम, SIR ड्यूटी के दौरान शिक्षा मित्र ने उठाया खौफनाक कदम, 'विनोद बावला' की भी हुई एंट्री
जेब से मिला दर्दभरा पत्र, बीएलओ अनुजवीर की हालत नाजुक, जेब से मिले पत्र और परिजनों के बयानों ने प्रशासनिक दावों की खोली पोल
मुजफ्फरनगर। जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव किनोनी में प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक के शिक्षामित्र और बीएलओ अनुजवीर बालियान द्वारा जहरीले पदार्थ का सेवन किए जाने के मामले में हर पल नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में अब कुख्यात अपराधी विनोद बावला का नाम उछलने और परिजनों द्वारा प्रधान पति व सरकारी कर्मचारियों पर सीधे आरोप लगाए जाने से सनसनी फैल गई है।
मेरठ मेडिकल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे अनुजवीर की पत्नी किरण और भाभी बेबी ने मीडिया के सामने आकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। परिजनों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान सुमन के पति देवेंद्र सिंह, सुपरवाइजर पंकज कुमार और ग्राम पंचायत सहायिका ने अनुजवीर पर गलत तरीके से दबाव बनाया।
परिजनों का कहना है कि गांव के कुख्यात विनोद बावला ने अपनी पत्नी का वोट बनवाने के लिए दस्तावेज दिए थे, लेकिन बीच के लोगों (प्रधान पति व अन्य) ने अनुजवीर को विनोद बावला के नाम से डराया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। परिजनों ने स्पष्ट किया कि "विनोद ने हमें कुछ नहीं कहा, बल्कि प्रधान पति और उसके साथियों ने उसके नाम का हौव्वा खड़ा कर अनुजवीर को इतना परेशान किया कि उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया।"
अधिकारियों की सफाई: कार्य का दबाव नहीं, आपसी विवाद!
दूसरी ओर, शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन इस मामले में 'काम के दबाव' की बात से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। बीएसए संदीप कुमार ने मेरठ मेडिकल पहुंचकर बीएलओ का हाल जाना और कहा कि एसआइआर (SIR) कार्य का कोई दबाव नहीं था, मामला आपसी विवाद का लग रहा है। वहीं, सुपरवाइजर पंकज कुमार का दावा है कि बीएलओ को तकनीकी जानकारी कम थी, इसलिए उन्होंने और पंचायत सहायक ने मदद कर कार्य पूरा कराया था।
एसएसपी संजय कुमार का कहना है कि अभी औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बिठा दी गई है।
घटनाक्रम और 'सुसाइड नोट' का रहस्य
बता दें कि वर्ष 2003 से कार्यरत शिक्षामित्र अनुजवीर ने सोमवार दोपहर स्कूल का कमरा बंद कर जहर खा लिया था। उनकी जेब से सब रजिस्ट्री अधिकारी के नाम एक पत्र मिला है, जिसमें प्रधान पति देवेंद्र, सुपरवाइजर पंकज और पंचायत सहायिका का नाम लिखकर स्पष्ट रूप से उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, किनौनी गांव की प्रधान सुमन के पति देवेंद्र सिंह का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। प्रधान पति देवेंद्र ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह खुद बीएलओ से मिलने मेडिकल गए थे और परिवार की मदद करना चाहते हैं।
विनोद बावला का कनेक्शन: फिर चर्चा में कुख्यात
करीब डेढ़ साल पहले दोहरे हत्याकांड में साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त हुआ विनोद बावला एक बार फिर सुर्खियों में है।शाहपुर थाना क्षेत्र के किनौनी गांव के सगे भाई श्रवण और नरेंद्र को गोली मार दी गई थी। करीब डेढ़ साल पहले आरोपी विनोद बावला को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया था। इसके बाद वह जेल से रिहा कर दिया गया। बताया गया है कि वह इस समय अकेला ही गांव में रहता है। परिजनों का कहना है कि विनोद बावला ने उन्हें सीधे कुछ नहीं कहा बल्कि मदद की पेशकश की थी, लेकिन सिस्टम के लोगों ने ही बीएलओ को उसके नाम से डराकर 'फार्म' खराब कर दिए और मानसिक रूप से तोड़ दिया।
एसपी देहात आदित्य बंसल के अनुसार, पुलिस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। बरामद पत्र में लिखे आरोपों की सत्यता जांची जा रही है और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की तैयारी है। प्रशासन भी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सरकारी कार्यों का अत्यधिक दबाव इस घटना की मुख्य वजह है।
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