ईयू के नेताओं ने प्रवासी प्रवाह के खिलाफ सतर्कता बरतने का लिया संकल्प, मध्य पूर्व में तनाव कम करने का आह्वान

ब्रूसेल्स। यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शपथ ली है कि वे मध्य पूर्व के संघर्षों से उत्पन्न किसी भी प्रभाव के प्रति सतर्क रहेंगे, जो ईयू देशों पर प्रवासन संबंधी दबाव बढ़ा सकता है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष यूरोप के लिए बढ़ता जोखिम पैदा कर रहा है। हालांकि यह संघर्ष तुरंत यूरोपीय संघ की ओर प्रवासी प्रवाह में नहीं बदला है। यूरोपीय परिषद की बैठक में नेताओं ने “उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने और आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने के महत्व” पर जोर दिया, जैसा कि शिखर सम्मेलन के बाद अपनाए गए निष्कर्षों में कहा गया।
ये भी पढ़ें अफगान विदेश मंत्री ने राजनयिकों से कहा,'पाकिस्तान के क्रूर हमले की सच्चाई से दुनिया को कराएं रूबरू' 2015 के प्रवासन संकट से मिली सीख पर ध्यान देते हुए ईयू ने कहा कि वह प्रवासन को रोकने और यूरोप में सुरक्षा बनाए रखने के लिए “अपने कूटनीतिक, कानूनी, संचालनात्मक और वित्तीय उपकरणों को पूरी तरह से तैनात करने” के लिए तैयार है। निष्कर्षों में कहा गया, “ईयू की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा और नियंत्रण को लगातार मजबूत किया जाएगा।” नेताओं ने मध्य पूर्व संघर्ष में तनाव घटाने और अधिकतम संयम अपनाने का भी आग्रह किया। सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन करने को कहा और ऊर्जा एवं जल सुविधाओं पर हमलों पर स्थगन का समर्थन किया। ईयू की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास में नेताओं ने जोर दिया कि इसके दो मौजूदा समुद्री सुरक्षा अभियानों यूनाफोर एपसाइड्स और यूनाफोर अटलांटा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन तैनात किए जाने चाहिए।
यूनाफोर एपसाइड्स और यूनाफोर अटलांटा दोनों ही ईयू के सैन्य अभियान हैं, जो समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। इनका संयुक्त क्षेत्र लाल सागर, हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र तक फैला है। 2015 के प्रवासन संकट के दौरान, सीरिया के युद्ध और अफगानिस्तान व इराक में अस्थिरता के कारण एक मिलियन से अधिक शरणार्थी और प्रवासी यूरोप में प्रवेश किए, जिससे सीमा और शरण प्रणाली पर दबाव पड़ा। इससे आपात स्थिति उत्पन्न हुई और ईयू के भीतर राजनीतिक विभाजन गहरा गया। यूरोपीय परिषद की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और इज़राइल से आग्रह किया कि वे ईरान के साथ युद्ध समाप्त करें और सैन्य कार्रवाई के स्थान पर कूटनीति अपनाने पर जोर दिया।
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