आज आरबीआई रेपो रेट पर अहम फैसला, केंद्रीय बैंक के रुख और आगे की गाइडेंस पर नजर रहेगी
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी शुक्रवार को मुख्य पॉलिसी रेट को लेकर अपना फैसला सुनाने वाली है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर 2025 में ब्याज दर घटाने के बाद फरवरी में रिजर्व बैंक फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, बैंक आगे की नीति को लेकर क्या संकेत देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
तीन दिन तक चलने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है। डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, मजबूत आर्थिक वृद्धि और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद वैश्विक जोखिम कम होने से रिजर्व बैंक आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए लचीली नीति अपना सकता है।
राव ने कहा, "महंगाई कम होने और रुपये पर दबाव बने रहने के बावजूद, डिपॉजिट जुटाने की चुनौतियों और पोर्टफोलियो आउटफ्लो के जोखिम को देखते हुए आगे रेट कट से बचा जा सकता है।"
अनुमान है कि रिजर्व बैंक नकदी प्रबंधन, बॉन्ड बाजार को स्थिर रखने और मुद्रा प्रबंधन जैसे उपायों पर ज्यादा ध्यान देगा। इस तिमाही और अप्रैल से जून 2026 के दौरान सरकारी बॉन्ड की खरीद जारी रह सकती है।
उम्मीद है कि आरबीआई डायरेक्ट लिक्विडिटी, बॉन्ड स्थिरता और करेंसी मैनेजमेंट उपायों पर निर्भर रहेगा, जिसमें इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 में बॉन्ड खरीदारी जारी रहेगी।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, नीतिगत ब्याज दर में ढील के बावजूद हाल के समय में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में लगातार तेजी देखने को मिली है। इसी वजह से रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाए रख सकता है।
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारा मानना है कि पात्र सिक्योरिटीज का चुनाव ही ओएमओ ऑपरेशंस की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है, भले ही लिक्विडिटी इंजेक्शन की कुल मात्रा अपरिवर्तित रहे।" इसमें आगे कहा गया है, "इसलिए आरबीआई आगामी पॉलिसी में यथास्थिति बनाए रखेगा।"
पिछली मौद्रिक नीति के बाद सबसे बड़ा बदलाव भारत और यूरोपीय संघ के साथ-साथ भारत और अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता है। इस समझौते के बाद भारत पर लगने वाला शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अब भारत एशियाई देशों में सबसे कम शुल्क वाले देशों में शामिल हो गया है। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को मजबूती मिलेगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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