शम्मी कपूर की वजह से चमका था राजीव कपूर का शुरुआती करियर, एक हिट देने के बाद बदल गई थी जिंदगी
मुंबई। जब हम बॉलीवुड की बात करते हैं तो कपूर खानदान का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि दशकों से कपूर खानदान की कई पीढ़ियों ने हिंदी सिनेमा में बड़ा योगदान दिया है। कपूर खानदान के कलाकार आज भी बॉलीवुड में काम कर रहे हैं और उनके शानदार स्टारडम का लुत्फ उठा रहे हैं। राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, रणधीर कपूर और ऋषि कपूर जैसे कलाकारों ने अपने समय में अपनी बड़ी पहचान बनाई। इसके बाद करिश्मा और करीना कपूर ने अभिनेत्री के तौर पर पर्दे पर राज किया। रणबीर कपूर का कद भी मौजूदा सुपरस्टार सरीखा है, जिन्होंने शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद खुद को मजबूती से स्थापित किया है।
हालांकि इस परिवार का एक सदस्य पर्दे पर वो पहचान नहीं बना पाया जो बाकी सितारों ने बनाई। हम बात कर रहे हैं राजीव कपूर की, जिन्होंने फिल्मों से लेकर डायरेक्शन तक में हाथ आजमाया लेकिन हर जगह असफलता हाथ लगी। 9 फरवरी को अभिनेता की पुण्यतिथि है।
राजीव कपूर राज कपूर के बेटे थे, जिन्होंने बहुत कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। शराब की लत और अपनी बीमारियों को अनदेखा करने की आदत ने उन्हें मौत के करीब लाकर खड़ा कर दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजीव कपूर को हिंदी सिनेमा में पहचान अपने पिता राज कपूर की वजह से नहीं, बल्कि अपने चाचा शम्मी कपूर की वजह से मिली थी? राजीव कपूर ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि उनकी शक्ल अंकल शम्मी कपूर से बहुत मिलती थी और जब उनकी फिल्में रिलीज होती थीं, तो लोगों को लगता था कि उनकी फिल्म आई है।
आलम ये था कि राजीव कपूर के किरदारों को शम्मी कपूर को ध्यान में रखकर पोट्रे किया जाने लगा। उन्होंने शम्मी कपूर के साथ अपनी करियर की पहली फिल्म 1983 में आई 'एक जान हैं हम' में काम किया था और उस वक्त शम्मी कपूर ने राजीव के पिता का रोल निभाया था। चाचा-भतीजे की शक्ल इतनी मिलती थी कि राजीव को सभी लोग शम्मी कपूर की छवि में देखने लगे और उन्हें फिल्में ऑफर होने का कारण भी वही था, लेकिन कुछ फिल्में करने के बाद राजीव को महसूस हुआ कि ये सही नहीं है और उन्हें अपनी अलग पहचान बनानी होगी, जिसके बाद उन्होंने खुद का स्टाइल और पर्सनैलिटी बनाने का फैसला लिया।
राजीव कपूर की 1983 में आई फिल्म 'एक जान हैं हम' में काम करने के बाद उन्हें उनके पिता राज कपूर ने 'राम तेरी गंगा मैली' फिल्म में काम करने का ऑफर दिया। वे अपने पिता को सर कहकर बुलाते थे, और जब उनके पिता ने 'राम तेरी गंगा मैली' का ऑफर दिया, तो उन्होंने बाकी सारी फिल्मों की डेट्स कैंसिल कर दी थीं। ये फिल्म उनके करियर की सुपरहिट फिल्म थी, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया था। लेकिन बॉलीवुड की ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिकी।
राजीव ने 'लवर बॉय', 'प्रीति', 'ज़लज़ला', 'आसमान', और 'हम तो चले परदेस' सहित कई फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन कोई भी फिल्म पर्दे पर कमाल नहीं कर पाई। जिसके बाद राजीव ने डायरेक्शन में हाथ आजमाया और 'प्रेम ग्रंथ' और 'आ अब लौट चलें' जैसी फिल्मों को डायरेक्ट किया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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