स्विगी और जेप्टो ने हटाया '10 मिनट डिलीवरी' का दावा, जानें क्यों कंपनियों को बदलना पड़ा अपना बिजनेस मॉडल..?
नई दिल्ली। त्वरित वाणिज्य (Quick Commerce) के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है। 'जेप्टो' (Zepto) और 'स्विगी इंस्टामार्ट' (Swiggy Instamart) जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने अब अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से '10 मिनट में डिलीवरी' का आक्रामक दावा हटा दिया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार, सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता और श्रम संगठन डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर चिंता जता रहे थे।
ये भी पढ़ें दिल्ली: खाड़ी देशों की ओर जाने वाली 100 से अधिक उड़ानें रद्द, यात्री बोले-नहीं होनी चाहिए जंगउपभोक्ता संरक्षण और सड़क सुरक्षा अधिकारियों ने '10 मिनट' के वादे पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि इस तरह के समयबद्ध लक्ष्य डिलीवरी ड्राइवरों को यातायात नियमों को तोड़ने और जोखिम उठाने के लिए मजबूर करते हैं। 10 मिनट के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित करने के प्रयास में दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या ने कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।कंपनियां अब '10 मिनट' की जगह 'मिनटों में' (In Minutes) या 'सुपरफास्ट' जैसे शब्दों का उपयोग कर रही हैं। इससे उन्हें ट्रैफिक और दूरी के आधार पर समय को लचीला (Flexible) रखने की सुविधा मिलती है।इससे पहले ज़ोमैटो के ब्लिंकिट ने भी अपनी मार्केटिंग भाषा को बदला था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी राह पर चलते हुए सीधे समय का दावा करने से परहेज किया है।
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अब ग्राहकों को ऐप पर 10 मिनट के बजाय 15-25 मिनट का अनुमानित समय दिखाई देगा, जो भीड़भाड़ और मौसम के अनुसार सटीक होगा।
डिलीवरी पार्टनर्स पर से "घड़ी की सुई" का दबाव कम होगा, जिससे सड़क पर उनकी सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है।
कंपनियां अब केवल गति के बजाय सामान की उपलब्धता और सेवा की गुणवत्ता (Quality of Service) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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