इजरायली गिरफ्तारी का दावा निकला फर्जी: केंद्र सरकार ने कांग्रेस समर्थक के 'X' पोस्ट को बताया गलत
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सफाई जारी करते हुए लोगों से ऐसी अफवाहों से सावधान रहने की अपील की। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थी। इसमें दावा किया गया था कि सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि ये दोनों एजेंट ईरान को फंसाने के लिए बम धमाकों की साजिश रच रहे थे। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है।
ये भी पढ़ें नोएडा में होली के दौरान दो सोसाइटियों में बवाल, मारपीट के वीडियो वायरल, 10 आरोपी गिरफ्तारमंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे बेतुके और बिना किसी आधार वाले दावों से सावधान रहें।" सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैल रही गलत सूचनाओं की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में किसी भारतीय नागरिक की इस तरह की गिरफ्तारी की कोई विश्वसनीय जानकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यह भ्रामक दावा 'एमोक्सिसिलिन' नाम के एक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट किया गया था। इसी अकाउंट से यह जानकारी शेयर की गई थी कि सऊदी अरब ने दो कथित मोसाद एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है। बताया जा रहा है कि यह अकाउंट लंबे समय से राजनीतिक रूप से झुकाव वाले पोस्ट साझा करता रहा है।
अकाउंट पर अक्सर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में कथित तौर पर सामग्री पोस्ट की जाती है और कई बार बिना पुष्टि वाली जानकारी भी साझा की जाती रही है। इस अकाउंट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषणों और बयानों की तारीफ करते हुए कई पोस्ट भी किए जाते हैं। कई बार उनके बयानों को साझा करते हुए उन्हें 'सांघियों' पर तीखा हमला बताया जाता है। 'सांघी' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन भाजपा, आरएसएस या दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए किया जाता है। इसके साथ ही अकाउंट पर अक्सर भाजपा और उसके समर्थकों का मजाक उड़ाने या आलोचना करने वाले पोस्ट भी साझा किए जाते हैं, जिनमें 'सांघी इकोसिस्टम' और 'भक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए लोगों को ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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