आरडीएफ नहीं ठोस अपशिष्ट जलाने की प्रथमदृष्टया पुष्टि के बाद भी कार्यवाही क्यों नहीं?–धर्मेंद्र मलिक
मुजफ्फरनगर। चांदपुर व मखियाली क्षेत्र के सचेत नागरिकों को आज यह जानकारी प्राप्त हुई कि लखनऊ से प्रदूषण नियंत्रण विभाग की एक टीम पेपर मिलों के निरीक्षण हेतु मुजफ्फरनगर आई हुई है। टीम के सदस्य होटल वेलविस्ता, बाईपास पर औद्योगिक इकाइयों के मालिकों से बैठक कर रहे थे। सूचना मिलने पर जब स्थानीय नागरिक होटल पहुंचे, तो देखा गया कि कुछ उद्योगपति रेंज रोवर जैसी महंगी गाड़ियों में वहां आए हुए थे। उनके जाने के बाद होटल स्टाफ ने बताया कि अधिकारी निकल चुके हैं।
इसी दौरान जानसठ रोड से गुजर रहे भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के तहसील अध्यक्ष जानसठ अंकित जावला ने प्रदूषण विभाग की गाड़ी में मौजूद क्षेत्रीय अधिकारी को पहचानकर बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारी बिना चर्चा किए गाड़ी लेकर रवाना हो गए। अंकित जावला उनके पीछे-पीछे मूलचंद क्षेत्र तक पहुंचे, जहां अधिकारी परिसर के अंदर चले गए और किसान व नागरिक बाहर ही वार्ता के उद्देश्य से खड़े रहे।
फोन पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी से आग्रह किया गया कि किसानों और नागरिकों की बात टीम से कराई जाए। इसके पश्चात टीम में शामिल अभियंता से बातचीत में अंकित जावला ने बताया कि शहर व आसपास के क्षेत्र के नागरिक प्रदूषित जल, वायु और धुएं से गंभीर रूप से परेशान हैं। औद्योगिक इकाइयों द्वारा आरडीएफ के नाम पर नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट को जलाया जा रहा है, जिससे लोगों की सांस लेना तक दूभर हो गया है। यह कुछ व्यापारियों के लाभ के लिए नागरिकों के जीवन और उनके संवैधानिक अधिकारों का खुला हनन है। प्रदूषण विभाग की टीम ने नमूने लेकर जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही का आश्वासन दिया।
इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि
“अगर जांच चोरी करने वालों से ही कराई जाएगी तो परिणाम क्या होगा, यह सभी जानते हैं। जब टीम निरीक्षण के लिए आई थी तो उसने होटल में बैठकर उद्योगपतियों से ही मुलाकात क्यों की?”
उन्होंने कहा कि एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें स्वयं प्रदूषण विभाग का अधिकारी यह स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि यह आरडीएफ नहीं बल्कि ठोस अपशिष्ट है। जब प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है, तो फिर कार्यवाही में देरी क्यों की जा रही है?
धर्मेंद्र मलिक ने आगे कहा कि जब किसी व्यक्ति या समूह के जीवन से जुड़ा मामला होता है, तो सर्वोच्च न्यायालय 48 घंटे के भीतर सुनवाई करता है। ऐसे में प्रदूषण विभाग द्वारा केवल “नमूना रिपोर्ट” का बहाना बनाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक की मांग है कि जिलाधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ऐसी सभी औद्योगिक इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई करें और उन्हें बंद कराया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
