गुरुग्राम में स्ट्रक्चरल ऑडिट चिंटल पैराडिसो के ई व एफ टावर भी मिले असुरक्षित
गुरुग्राम । करोड़ों रुपये खर्च करके भी लोगों का जीवन सुरक्षित नहीं है। अट्टालिकाओं में रहकर अपने सपनों की दुनिया को जी रहे लोगों का जीवन बिल्डर ने किस तरह से खतरे में डाला है, यह परत-दर-परत सामने आ रहा है। हम बात कर रहे हैं चिंटल पैराडिसो सोसायटी की, जिसमें पिछले साल छत गिरने […]
गुरुग्राम । करोड़ों रुपये खर्च करके भी लोगों का जीवन सुरक्षित नहीं है। अट्टालिकाओं में रहकर अपने सपनों की दुनिया को जी रहे लोगों का जीवन बिल्डर ने किस तरह से खतरे में डाला है, यह परत-दर-परत सामने आ रहा है। हम बात कर रहे हैं चिंटल पैराडिसो सोसायटी की, जिसमें पिछले साल छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया था।
आईआईटी दिल्ली की टीम द्वारा इस सोसायटी का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जा रहा है। इससे पहले डी टावर को टीम ने असुरक्षित घोषित किया था तो अब इसके ई व एफ टावर को भी असुरक्षित करार दिया गया है। चिंटल पैराडिसो के टावर-डी में हुए हादसे की जांच के लिए जिला प्रशासन द्वारा गठित एसआईटी के अध्यक्ष एवं एडीसी विश्राम कुमार मीणा के मुताबिक आईआईटी दिल्ली की टीम द्वारा टावर ई और एफ की स्ट्रक्चरल ऑडिट की रिपोर्ट जारी कर दी गई। टीम की रिपोर्ट में इन टावर्स के निर्माण में ढांचागत कमियां मिली है। जिसकी मरम्मत तकनीकी और आर्थिक आधार पर संभव नहीं है, इसलिए यह टावर्स रिहायश के योग्य नहीं है।
एडीसी ने आईआईटी की टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया कि बीते वर्ष 10 फरवरी को चिंटल पैराडिसो के टावर डी में हुए हादसे में दो व्यक्तियों की जान चली गई थी। उसके बाद आईआईटी दिल्ली की टीम को इस टावर की स्ट्रक्चरल ऑडिट की जांच सौंपी गई थी। आईआईटी दिल्ली ने पहले नवंबर, 2022 में जारी अपनी जांच रिपोर्ट में टावर डी को असुरक्षित करार दिया था। जिसकी मूल्यांकन रिपोर्ट भी टावर के निवासियों व डेवलपर के साथ सेटलमेंट संबंधी प्रक्रिया के लिए सांझा की जा रही है। वहीं अब ई और एफ टावर को भी रिहायश के लिए असुरक्षित बताया है।
हाल ही में आई रिपोर्ट में भी बिल्डिंग के निर्माण में इस्तेमाल कंक्रीट में क्लोराइड की अधिक मात्रा में मिला है। जिससे निर्माण में इस्तेमाल स्टील व कंक्रीट का क्षरण हो गया। आईआईटी दिल्ली की टीम ने यह भी सिफारिश की है कि ई और एफ टावर को बंद कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि आईआईटी दिल्ली की जांच रिपोर्ट के आधार पर ई और एफ टावर के अलॉटियों का नियमानुसार पुनर्वास किया जाएगा। इसी प्रकार इसी सोसायटी के टावर ए और जी में भी स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए सेंपलिंग का कार्य पूरा हो चुका है, वहीं टावर एच में सेंपलिंग का कार्य जारी है।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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