नोएडा । एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा आज से दो दिवसीय उद्यमिता एवं स्थायी व्यापार विकास पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीईएसबीडी 26) के चतुर्थ संस्करण का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ डीएस समूह की मुख्य मानव संसधान अधिकारी एवं एक्जीक्यूटिव सलाहकार सिमिन अस्करी, एमिटी विवि. की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, मैककेन फूड की स्थायीत्व और समाजिक संचार की प्रमुख शरण्या प्रधान, लजुबजाना विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इकोनॉमिक एंड बिजनेस के प्रोफेसर डा मतेज सेर्न, एमिटी विवि. के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा संजीव बंसल, बुक माइ जेट के संस्थापक एवं सीईओ संतोष शर्मा और एमिटी स्कूल ऑफ बिजनेस की निदेशक डा सुजाता खंडाई द्वारा किया गया।
इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन के अंर्तगत ‘नेक्स्ट जेन-इनोवेट एक्सपो 2026 का आयोजन किया गया है, जिसमें युवा उद्यमियों द्वारा शुरू किए गए 29 सस्टेनेबल, डिजिटल और उभरते उद्यम और स्टार्टअप्स को दिखाया गया। इस एक्सपो का मकसद उद्यमियों, उद्योगों, निवेशकों, विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग और नॉलेज शेयरिंग को बढ़ावा देना है।
सम्मेलन के पहले दिन सिमिन अस्करी ने कहा कि वर्तमान व्यापार को केवल स्थायीत्व द्वारा संचालित नहीं किया जा सकता यह निरंतर विकास की मांग करता है। उन्होनें तीन प्रमुख परिदृश्यों को रेखांकीत करते हुए कहा कि प्रथम गिग इकोनॉमी जिसमें प्रतिभा तक पहुंचने के बड़ी संख्या में लचीलापन है। गिग कर्मचारियों को कल्याणकारी योजनाओं के अंर्तगत पहचान मिल रहा है। द्वितीय स्थायीत्व है जिसके अंर्तगत आज के युवा जलवाुय परिवर्तन, प्रदूषण को समझ कर उसे कम करने के लिए कार्य कर रहे है। हरित संचालन केवल प्रवृत्ति ही नही है बल्कि आत्मसात की जा रही है। सुश्री अस्करी ने कहा कि ग्रह की कीमत पर विकास की बजाय ग्रह के साथ विकास को प्रमुखता दी जा रही है। डिजिटल परिवर्तन ने रिश्तों को बदलकर और आपसी विश्वास को मजबूत किया है। उन्होनें छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि कभी भी सीखना बंद ना करें, अगर कुछ पुराना त्याग रहे है तो नये को सीखना आवश्यक है।
वहीं सम्मेलन के तकनीकी सत्र के अंर्तगत गिग इकोनॉमी में स्थायी नवाचार पर परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें गुफ्तगु के संस्थापक और निदेशक राहूल जैन, डेलॉयट के निदेशक नवीन टंडन, ग्लोबल हनी बी के सीईओ सोनल सहगल, द की एलएलपी की संस्थापक शालिनी कंसल सहित अन्य ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर पेपर विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें लंदन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा. इवान जुपिक और दिल्ली टेक्नीकल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. अमित मुखर्जी ने जानकारी प्रदान की।
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