भारतीय सेना ने बदले ब्रिटिश काल के 246 सड़कों और इमारतों के नाम,जानिए पूरी लिस्ट और कारण
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से गुलामी की मानसिकता से बाहर आने का आह्वान किया था। अंग्रेजों के समय के नियमों से लेकर पुराने कानूनों तक को बदलने का काम जारी है। सेना ने भी इसी के मद्देनजर तेजी से औपनिवेशिक दौर के नामों को बदलने का काम आगे बढ़ाया है। इसी कड़ी में सेना ने देशभर के आर्मी कैंट और सैन्य संस्थानों के ब्रिटिश काल के नामों में बदलाव कर दिया है। ऐसे कुल 246 सड़कों और इमारतों को नया नाम दिया गया है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक कुल 124 सड़कें, 77 रिहायशी कॉलोनियां, 27 इमारतें व सैन्य सुविधाएं और 18 अन्य सुविधाएं, जैसे पार्क, ट्रेनिंग एरिया, खेल मैदान, गेट और हेलीपैड के नाम बदले गए हैं। खास बात यह है कि ये सभी नाम वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों और प्रमुख सैन्य नेताओं के योगदान को सम्मान देते हुए उनके नाम पर रखे गए हैं।
दिल्ली कैंट का किर्बी प्लेस अब केनुगुरुसे विहार और मॉल रोड को अरुण खेतरपाल मार्ग के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह अंबाला कैंट के पैटरसन रोड क्वार्टर्स को धन सिंह थापा एन्क्लेव नाम दिया गया है। मथुरा कैंट में न्यू हॉर्न लाइन का नाम वीर अब्दुल हमीद लाइंस है, जबकि जयपुर कैंट में क्वींस लाइन रोड का नाम बदलकर सुंदर सिंह मार्ग कर दिया गया है।
बरेली कैंट में न्यू बर्डवुड लाइन का नाम बदलकर थिमैया कॉलोनी कर दिया गया, वहीं महू कैंट के मैल्कम लाइन्स को पीरू सिंह लाइन्स किया गया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी के कॉलिन्स ब्लॉक का नाम नुब्रा ब्लॉक और किंग्सवे ब्लॉक का नाम कारगिल ब्लॉक कर दिया गया है। रंगापहाड़ मिलिट्री स्टेशन के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का नाम बदलकर लैशराम ज्योतिन सिंह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स रखा गया है। जखामा मिलिट्री स्टेशन में स्पीयर लेक मार्ग का नाम बदलकर हैंगपन दादा मार्ग कर दिया गया है।
नाम बदलने का सुझाव स्वयं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2021 में दिया था। उन्होंने डिफेंस एस्टेट्स डायरेक्टोरेट यानी रक्षा संपदा महानिदेशालय के 96वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि छावनियों में कई सड़कें और भवन ऐसे हैं, जिनके नाम ब्रिटिश क्राउन के वफादार अधिकारियों और सैनिकों के नाम पर रखे गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि रक्षा मंत्रालय और डीजीडीई इस पर विचार करें कि ऐसे नाम हमारे बहादुर सैनिकों और आधुनिक भारत के निर्माताओं के नाम पर रखे जाएं और यह काम जल्द पूरा किया जाए। रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि नाम बदलते समय यह ध्यान रखा जाए कि यदि किसी ब्रिटिश अधिकारी ने स्थानीय जनता के लिए अच्छा कार्य किया हो, तो उनकी पहचान आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे और उनके नाम सम्मानपूर्वक यथावत रखे जाएं।
साल 2024 में ही भारतीय सेना ने कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड के मुख्यालय फोर्ट विलियम का नाम बदलकर विजय दुर्ग कर दिया है, जो छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा गया है। फोर्ट विलियम में किंग जॉर्ज के नाम पर बने द्वार, जिसे पहले जॉर्ज गेट कहा जाता था, अब शिवाजी द्वार कहलाता है। फोर्ट के प्राचीर पर स्थित किचनर हाउस, जिसका नाम 1902 से 1909 के बीच रहे कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल होरेशियो हर्बर्ट किचनर के नाम पर था, अब फील्ड मार्शल मानेकशॉ भवन के नाम से जाना जाता है। इसी फोर्ट में स्थित चार मंजिला इमारत, जिसे पहले डलहौजी बैरक कहा जाता था और जहां 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को रखा गया था, अब नेताजी बैरक कहलाती है। फोर्ट में मौजूद रसेल ब्लॉक का नाम बदलकर बंगाल के स्वतंत्रता सेनानी बाघा जतिन के नाम पर रखा गया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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