नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना की 'रहस्यमयी' रिहाई पर गिरी गाज: बांदा जेलर निलंबित, अधीक्षक के खिलाफ जाँच के आदेश, पुलिस में हड़कंप
बांदा/नोएडा। उत्तर प्रदेश की बांदा मंडल कारागार एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। कुख्यात स्क्रैप माफिया रवींद्र नागर उर्फ रवि काना की संदिग्ध परिस्थितियों में जेल से रिहाई के मामले में शासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। डीजी जेल पीसी मीणा ने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और न्यायिक अवहेलना को देखते हुए बांदा के जेलर विक्रम सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही जेल अधीक्षक अनिल गौतम के खिलाफ विभागीय जांच (अनुशासनिक कार्रवाई) के आदेश दिए गए हैं।
पूरा मामला न्यायिक आदेशों की अनदेखी से जुड़ा है। गौतमबुद्ध नगर की सीजेएम अदालत ने रवि काना के खिलाफ धारा 386 (जबरन वसूली) और आपराधिक धमकी के मामले में बी-वारंट जारी किया था। 28 जनवरी 2026 को यह वारंट जेल प्रशासन को प्राप्त हुआ, जिसमें 29 जनवरी को आरोपी को अदालत में पेश करने का आदेश था।
पुलिस गार्ड उपलब्ध न होने के कारण रवि काना को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अदालत में पेश किया गया। जेल प्रशासन का तर्क है कि पेशी के बाद उन्हें कोई नया अभिरक्षा वारंट या अगली तारीख नहीं मिली, और चूंकि अन्य मामलों में रिहाई के आदेश पहले से थे, इसलिए उन्होंने 29 जनवरी की शाम 6:39 बजे उसे रिहा कर दिया।
अदालत की फटकार: न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप
अदालत ने जेल प्रशासन के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है। सीजेएम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जेल प्रशासन को पता था कि आरोपी बी-वारंट पर तलब है और रिमांड पर सुनवाई चल रही है, तो बिना अदालत की अनुमति के उसे छोड़ना न्यायिक आदेशों की खुली अवहेलना है। इसे एक सोची-समझी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है, जिससे नोएडा पुलिस की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है।
कौन है रवि काना?
रवि काना पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा स्क्रैप माफिया है। उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है और उसकी करोड़ों की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। अगस्त 2024 में उसे सुरक्षा कारणों से गौतमबुद्ध नगर से बांदा जेल स्थानांतरित किया गया था। जेल से छूटने के बाद रवि काना कहाँ गया, इसकी जानकारी नोएडा पुलिस के पास भी नहीं है। फिलहाल पुलिस उन लोगों की तलाश कर रही है जो रिहाई के समय उसके संपर्क में थे।
पूरे मामले की जांच डीआईजी जेल प्रयागराज को सौंपी गई है। कार्रवाई की भनक लगते ही दोनों संबंधित अधिकारियों ने अपने सरकारी सीयूजी नंबर बंद कर लिए हैं।
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लेखक के बारे में
गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ पत्रकार रणजीत पांडेय पिछले डेढ़ दशक (15 वर्ष) से रॉयल बुलेटिन परिवार के एक अटूट और विश्वसनीय स्तंभ हैं। राजनीति विज्ञान में परास्नातक (MA Pol Sc) और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा की विशेषज्ञता रखने वाले श्री पांडेय ने अपने लंबे सफर में क्षेत्र की हर जटिल राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलचल को बेहद करीब से परखा है।
'चैनल वन' और 'पंजाब केसरी' जैसे संस्थानों में कार्य का अनुभव रखने वाले रणजीत पांडेय वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में जिला प्रभारी (गौतमबुद्ध नगर) की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। अपनी सुलझी हुई लेखनी और गहन विश्लेषण के लिए पहचाने जाने वाले रणजीत पांडेय से जिले की खबरों, जन-समस्याओं और संवाद हेतु आप मोबाइल नंबर 8800472411 पर संपर्क कर सकते हैं।

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