पूर्वी चंपारण में एसटीएफ और अपराधियों के बीच मुठभेड़, एक जवान शहीद, दो कुख्यात ढेर

मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में मंगलवार की सुबह पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में विशेष कार्य बल (एसटीएफ)का एक जवान शहीद हो गया तथा दो कुख्यात अपराधी ढ़ेर हो गये। पुलिस सूत्रों ने बताया कि चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव में सुबह करीब 2:30 बजे एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर अपराधियों के ठिकाने पर छापेमारी की। इस दौरान खुद को घिरता देख अपराधियों ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए कार्रवाई की, जिसमें दो अपराधी मारे गए।
मारे गए अपराधियों की पहचान कुंदन ठाकुर और प्रियंशु दुबे के रूप में हुई है। दोनों पर आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। बताया जाता है कि मुठभेड़ से पहले कुंदन ठाकुर ने नेपाल के नंबर से चकिया थाना के अपर थानाध्यक्ष को फोन कर पुलिस को खुलेआम चुनौती देते हुए कई पुलिसकर्मियों को मारने की धमकी दी थी।
सूत्रों ने बताया कि धमकी के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कॉल ट्रेसिंग के जरिए अपराधियों का लोकेशन हासिल किया और एसटीएफ के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया। घेराबंदी के दौरान हुई मुठभेड़ में एसटीएफ के जवान राम यादव शहीद हो गये। घटनास्थल से पुलिस ने एक कार्बाइन, दो पिस्तौल , दो कट्टा, पांच कारतूस और 17 खोखा बरामद किए हैं। वहीं मौके से उज्ज्वल कुमार और संत कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया गया है, जो पिता-पुत्र बताए जा रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ की सूचना मिलते ही उप पुलिस महानिरीक्षक( डीआईजी)और पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अन्य फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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