वकील की हत्या के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल से न्यायालय का कामकाज ठप, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को अधिवक्ताओं ने न्यायालयीन कार्य से विरत रहकर विरोध प्रदर्शन किया। यह कदम शिवपुरी जिले के करेरा में अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की दिनदहाड़े हत्या के विरोध में उठाया गया। वकीलों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की।
अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते न्यायालय में सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे दूर-दराज से आए पक्षकारों को निराश लौटना पड़ा। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय चौधरी ने कहा कि अधिवक्ताओं पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाना समय की मांग है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी यह मांग उठाई गई, लेकिन सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई। एडवोकेट देवेंद्र रावत ने कहा कि साथी वकील की हत्या से पूरे प्रदेश में आक्रोश है। उन्होंने मांग की कि आरोपियों के खिलाफ मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए और जांच किसी विशेष एजेंसी से कराई जाए, ताकि शीघ्र और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
जमानत की आस में इंतजार करती रही मां
हड़ताल का असर आम लोगों पर भी पड़ा। तुलसी राय नामक महिला अपने बेटे की जमानत पर सुनवाई के लिए अदालत पहुंची थीं, लेकिन काम बंद होने की जानकारी मिलने पर मायूस हो गईं। उनका बेटा धोखाधड़ी के आरोप में जेल में है और सोमवार को उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई निर्धारित थी। महिला को उम्मीद थी कि कुछ घंटों बाद कामकाज शुरू हो जाएगा, इसलिए वह अपने वकील की टेबल पर बैठकर इंतजार करती रहीं।
नारेबाजी और प्रदर्शन
कोर्ट परिसर में वकीलों ने जमकर नारेबाजी की और अपनी कुर्सियों पर बैठकर काम बंद रखा। उनका कहना था कि जब तक अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भाड़े के शूटरों ने की थी हत्या
गाैरतलब है कि 14 फरवरी को करेरा में अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वे कोर्ट जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पुराने विवाद के चलते भाड़े के शूटरों को सुपारी दी गई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शूटरों और कथित साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह घटना न केवल एक व्यक्ति की हत्या है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। इसलिए दोषियों को कड़ी सजा और अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस कानून अनिवार्य है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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