मध्यप्रदेश में आइसक्रीम को लेकर बड़ा खुलासा "सतर्क" रहें जांच में बड़े ब्रांड की आइसक्रीम अमानक पाई गई
हाल ही में प्रदेश में दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता सामने आई थी और अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। छिंदवाड़ा से सामने आई एक रिपोर्ट ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में दो बड़े ब्रांड की आइसक्रीम के कुछ फ्लेवर अमानक पाए गए हैं। इस खबर के सामने आने के बाद आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि गर्मी के मौसम में बच्चे और परिवार सबसे ज्यादा आइसक्रीम का सेवन करते हैं।
गर्मी के मौसम में आइसक्रीम की बढ़ती खपत
गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में आइसक्रीम और कोल्डड्रिंक की मांग तेजी से बढ़ जाती है। बच्चे हों या बड़े हर कोई ठंडक पाने के लिए आइसक्रीम खाना पसंद करता है। ऐसे समय में अगर खाने की चीजों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगें तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
ये भी पढ़ें धीरेंद्र शास्त्री बोले- जो चेले ‘लड़कीबाजी’ के चक्कर में पड़े…वह छोड़ दें, वर्ना पर्चा खोल देंगेप्रदेश में इस समय मिलावट से मुक्ति अभियान भी चलाया जा रहा है जिसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच कर रहा है।
छिंदवाड़ा में खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
छिंदवाड़ा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर के कई छोटे और बड़े आइसक्रीम विक्रेताओं से नमूने इकट्ठा किए थे। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया ताकि यह पता चल सके कि बाजार में बिक रही आइसक्रीम तय मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी गोपेश मिश्रा की टीम ने शहर में बिकने वाले कई ब्रांड की आइसक्रीम के नमूने लिए। इस दौरान टॉप एंड टाउन ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता जानहवी फूड्स सिवनी रोड से और हैवमोर ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता सरकार डिस्ट्रीब्यूटर्स से भी अलग अलग फ्लेवर के नमूने जांच के लिए भेजे गए।
लैब रिपोर्ट में कई फ्लेवर पाए गए अमानक
राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार टॉप एंड टाउन ब्रांड के मैंगो बटर स्कॉच और वनीला फ्लेवर के नमूने तय मानकों के अनुसार नहीं पाए गए।
इसी तरह हैवमोर ब्रांड की अल्फोंसो मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम भी जांच में अमानक पाई गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।
कंपनियों को जारी किया गया नोटिस
लैब रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों ब्रांड के वितरणकर्ताओं और निर्माणकर्ता कंपनियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 46(4) के तहत दिया गया है।
इस कानून के अनुसार संबंधित कंपनियों को यह अधिकार होता है कि वे विभाग के पास मौजूद नमूने के दूसरे हिस्से को केंद्रीय खाद्य जांच प्रयोगशाला में दोबारा जांच के लिए भेज सकते हैं।
जांच के बाद हो सकती है कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस अवधि पूरी होने के बाद जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में दोष साबित होता है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार चालान न्यायालय में पेश किया जाएगा।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद लोगों के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच जरूरी है ताकि आम जनता को सुरक्षित भोजन मिल सके।
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