स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल: एम्बुलेंस नहीं मिलने पर सड़क पर प्रसव, मोबाइल की रोशनी में जन्मी बच्ची
जानकारी के अनुसार घटना पठारी इलाके के छपारा गांव की है, जहां से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज 3 किलोमीटर दूर है। छपारा गांव निवासी संध्या पत्नी संजय आदिवासी को गुरुवार रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस पर कई बार कॉल किया, लेकिन हर बार कुछ देर में पहुंचने का आश्वासन मिलता रहा। घंटों इंतजार के बाद भी जब कोई मदद नहीं पहुंची, तो मजबूरी में परिजन संध्या को पैदल ही अस्पताल ले जाने निकल पड़े। करीब एक किलोमीटर चलने के बाद गढ़ी मोहल्ला स्थित राशन दुकान के सामने संध्या को असहनीय दर्द हुआ। हालत बिगड़ती देख परिजनों ने उन्हें सड़क किनारे जमीन पर लिटा दिया।
मोबाइल की टॉर्च में हुआ प्रसव
कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बीच संध्या का पति मोबाइल की टॉर्च जलाकर खड़ा रहा। ठंड से बचाने के लिए सिगड़ी जलाई गई और महिला को प्लास्टिक की तिरपाल ओढ़ाई गई। इसी बीच पठारी की चौकीदार हरी बाई मौके पर पहुंचीं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने स्थानीय दाई राजबाई को बुलाया। दोनों महिलाओं ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए सड़क पर ही सुरक्षित प्रसव कराया। रात करीब 3 बजे बच्ची का जन्म हुआ।
3 घंटे सड़क पर पड़ी रहीं मां-बेटी
प्रसव के बाद भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची। मां और नवजात बच्ची करीब 3 घंटे तक सड़क पर ही लेटी रहीं। इसके बाद स्थानीय निवासी संजय जैन मदद के लिए आगे आए। नाल कटने के बाद वे अपनी कार से मां और बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे।
पति बोला— फोन करते रहे, कोई नहीं आया
संध्या के पति संजय आदिवासी ने कहा, “अगर समय पर एम्बुलेंस आ जाती, तो मेरी पत्नी को सड़क पर यह दर्द नहीं सहना पड़ता। 3 बार फोन किया, हर बार 15-15 मिनट होल्ड पर रखा गया। रात 2 बजे पैदल निकले, लेकिन रास्ते में ही डिलीवरी हो गई।” संध्या ने बताया कि 108 पर फोन करने पर देर से आने की बात कही गई, जबकि 112 पर कॉल करने पर कहा गया—“एम्बुलेंस का नंबर ले लो, हम अभी नहीं आ पाएंगे।”
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
इस मामले पर सीएमएचओ रामहित कुमार ने कहा कि पठारी क्षेत्र के आसपास कुरवाई और त्योंदा में एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। लापरवाही कहां हुई, इसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि इससे पहले भी जिले में एम्बुलेंस सेवा को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं और पूर्व में जुर्माना लगाया गया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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