भारतीय वैज्ञानिकों ने सूर्य की रोशनी से चलने वाला सेल्फ-चार्जिंग एनर्जी स्टोरेज डिवाइस विकसित किया
नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए सूर्य की रोशनी से चलने वाला सेल्फ-चार्जिंग एनर्जी स्टोरेज डिवाइस विकसित किया है। यह अत्याधुनिक तकनीक एक ही उपकरण में सौर ऊर्जा को संग्रहित करने और उसे स्टोर करने की क्षमता रखती है। इस डिवाइस को फोटो-कैपेसिटर नाम दिया गया है।
यह शोध बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज़ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। अब तक सौर ऊर्जा प्रणालियों में बिजली उत्पादन और भंडारण के लिए अलग-अलग यूनिट्स का उपयोग किया जाता था, जिससे सिस्टम जटिल, महंगा और ऊर्जा हानि वाला हो जाता था। नई तकनीक इन सभी चुनौतियों को काफी हद तक दूर करती है। यह शोध रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की प्रतिष्ठित पत्रिका सस्टेनेबल एनर्जी एवं फियूलस में प्रकाशित हुआ है और इसे भारत की क्लीन एनर्जी महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इसे विकसित करने वाली वैज्ञानिक डॉ. कविता पांडेय ने बताया कि इस डिवाइस में निकेल-कोबाल्ट ऑक्साइड नैनोवायर्स का इस्तेमाल किया गया है। ये नैनोवायर्स अत्यंत सूक्ष्म होते हुए भी एक छिद्रयुक्त और प्रवाहकीय त्रि-आयामी संरचना बनाते हैं, जो सूर्य के प्रकाश को प्रभावी रूप से अवशोषित कर विद्युत चार्ज को संग्रहित करती है। इस अनूठी संरचना के कारण यह सामग्री एक साथ सोलर एनर्जी हार्वेस्टर और सुपरकैपेसिटर इलेक्ट्रोड के रूप में काम करती है।
परीक्षणों के दौरान पाया गया कि प्रकाश में आने पर इस इलेक्ट्रोड की कैपेसिटेंस में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 10,000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी डिवाइस ने 85 प्रतिशत क्षमता बनाए रखी, जो इसकी दीर्घकालिक स्थिरता को दर्शाता है। डॉ कविता ने बताया कि वास्तविक उपयोग की संभावना को परखने के लिए एक असिमेट्रिक फोटो-सुपरकैपेसिटर भी तैयार किया, जिसने 1.2 वोल्ट का स्थिर आउटपुट प्रदान किया।
यह तकनीक पोर्टेबल, वेयरेबल और ऑफ-ग्रिड उपकरणों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, खासकर उन दूरदराज़ क्षेत्रों में जहां बिजली की पहुंच सीमित है। इससे पारंपरिक बैटरियों और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ, टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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