महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल: गणेश नाईक के नामोनिशान मिटा देने वाले बयान पर भड़की 'शिंदे सेना', गठबंधन में दरार के संकेत?
मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और वन मंत्री गणेश नाईक की ओर से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नामोनिशान का नामोनिशान मिटा देंगे वाले व्यक्तव्य से शिंदे की शिवसेना में नाराजगी फैल गई है। शिवसेना शिंदे समूह के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा है कि अगर वनमंत्री का इसी तरह का बयान आता रहा तो हम भी इसी तरह का व्यक्तव्य देंगे। गृहराज्यमंत्री संभुराजे देसाई ने कहा कि अगर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विरुद्ध फिर इस तरह का बयान आया तो, शिंदे समूह भी इसी तरह का बयान देगा। जानकारी के अनुसार सोमवार को वनमंत्री गणेश नाईक ने कहा कि हालांकि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। हमने आदेश स्वीकार किया क्योंकि पार्टी ने दिया था। भले ही हमें यह पसंद न आया हो, कार्यकर्ताओं ने इसे बर्दाश्त किया।
लेकिन अगर हमें पार्टी की तरफ से छूट मिली तो हम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रुप से समाप्त कर देंगे। वनमंत्री गणेश नाईक के इस व्यक्तव्य के बाद शिवसेना शिंदे समूह में नाराजगी फैल गई। शिवसेना शिंदे समूह के नेता और मंत्री शंभूराज देसाई ने भी गणेश नाइक की आलोचना का जवाब आक्रामक अंदाज में दिया है। राजनीति में कोई किसी से कम नहीं है, अगर किसी को मारने की बात की जाती है, तो बाकी लोग चुप नहीं बैठते। समय आने पर हम भी अपना स्टैंड लेंगे, हमारी पार्टी भी मुंहतोड़ जवाब देगी ।
उल्लेखनीय है कि मुंबई में चल रहे नगर निगम चुनाव के दौरान वन मंत्री गणेश नाईक ने इस तरह के व्यक्तव्य किए थे, लेकिन उस समय को कोई प्रतिक्रिया नहीं उभरी थी,लेकिन नगर निगम चुनाव के बाद वनमंत्री गणेश नाईक के बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया शिंदे समूह ने व्यक्त की है। इस प्रतिक्रिया के बाद गणेश नाईक की प्रतिक्रिया अभी तक मीडिया के समक्ष नहीं आई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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