'घूसखोर पंडत' टाइटल पर सियासी भूचाल, केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह समेत वृंदावन के संतों ने जताई कड़ी आपत्ति
मुंबई । नेटफ्लिक्स की फिल्म 'घूसखोर पंडत' रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर धार्मिक और जातीय भावनाएं आहत होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय और सनातन धर्म से जुड़े संगठनों में इस नाम को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसमें राजनीतिक बयान, संत समाज का आक्रोश और प्रशासनिक कार्रवाई भी शामिल हो चुकी है। इस पूरे मामले पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और संत समाज ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में फिल्म के नाम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने लिखा, ''नेटफ्लिक्स की फिल्म 'घूसखोर पंडत' के जरिए ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का घृणित प्रयास किया गया है। फिल्म के शीर्षक और कथित चित्रण में जिस तरह की जातिसूचक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ है, वह पूरी तरह निंदनीय है। इस तरह की सामग्री समाज के ताने-बाने के साथ खिलवाड़ है।''
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने आगे लिखा, "मैं इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करता हूं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस संबंध में लखनऊ पुलिस की कार्रवाई पूर्णतया उचित है।''वहीं, फिल्म को लेकर संत समाज में भी गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। वृंदावन के संतों ने व्यापक विरोध दर्ज कराते हुए फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
संतों ने कहा, "यह फिल्म सनातन धर्म को नीचा दिखाने का काम कर रही है, और लंबे समय से एक विशेष सोच के तहत सनातन पर लगातार प्रहार किए जा रहे हैं। पहले भी कई बार धार्मिक प्रतीकों और समुदायों को विवादास्पद ढंग से प्रस्तुत किया गया है, और अब इस फिल्म के जरिए ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है।"संतों ने कहा, ''प्राचीन काल से ही सनातन धर्म में ब्राह्मणों को विशेष सम्मान प्राप्त रहा है। राजा-महाराजा भी उनके ज्ञान और सलाह को महत्व देते थे और समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका अहम रही है, लेकिन आज के समय में कुछ लोग जानबूझकर ब्राह्मणों की छवि को नकारात्मक रूप में पेश कर रहे हैं। निर्माता और अभिनेता केवल नाम और चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह के विवादित शीर्षक चुनते हैं।''
संतों ने कहा, ''जन्म हो या मृत्यु, हर महत्वपूर्ण संस्कार और कर्मकांड में पंडित की भूमिका केंद्रीय होती है। ऐसे में फिल्म के शीर्षक में 'पंडत' शब्द के साथ 'घूसखोर' जैसे शब्द का इस्तेमाल करना पूरे समुदाय को अपमानित करने जैसा है। मनोरंजन के नाम पर किसी भी समुदाय की छवि खराब करना स्वीकार्य नहीं है।'' संतों ने सरकार से मांग की है कि फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और इसके निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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