जम्मू-कश्मीर में एनआईए की बड़ी स्ट्राइक: हंदवाड़ा और कुपवाड़ा समेत 12 ठिकानों पर छापेमारी
लाल किला ब्लास्ट केस में गजवत-उल-हिंद (एजीएच) आतंकी मॉड्यूल के नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी

श्रीनगर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र पर बड़ा प्रहार किया। दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए एनआईए की टीमों ने घाटी के हंदवाड़ा, कुपवाड़ा, कुलगाम, रफियाबाद और सोपोर सहित कुल 12 संवेदनशील स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकी वित्तपोषण और रसद सहायता प्रदान करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश करना है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हंदवाड़ा जिले के गुलोरा क्षेत्र में एक रसूखदार कारोबारी के आवास को निशाने पर लिया। सूत्रों के मुताबिक, एनआईए की टीम तड़के ही सुरक्षाबलों के साथ कारोबारी के घर पहुंची और पूरे इलाके को सील कर दिया। घंटों चली इस तलाशी के दौरान डिजिटल साक्ष्य, संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किया गया है। प्रारंभिक इनपुट के अनुसार, इस कारोबारी के तार सीधे तौर पर दिल्ली धमाके की साजिश से जुड़े होने का संदेह है। एनआईए आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब तक इस मामले में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा से 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आज की छापेमारी का मकसद उन छिपे हुए मददगारों को बेनकाब करना है जो सीमा पार के इशारे पर घाटी में दहशतगर्दी को खाद-पानी दे रहे हैं।
'ओवर ग्राउंड वर्कर' नेटवर्क पर भी वार
एनआईए की जांच में जमीर अहमद और तुफैल अहमद के नाम प्रमुखता से उभरे हैं, जो एजीएच के सक्रिय 'ओवर ग्राउंड वर्कर' (OGW) के रूप में काम कर रहे थे। जांच एजेंसी का मानना है कि इन कार्यकर्ताओं ने ही आतंकियों को दिल्ली तक पहुंचने और विस्फोटक सामग्री जुटाने में मदद की थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
छापेमारी के दौरान किसी भी अप्रिय घटना या विरोध को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को भारी संख्या में तैनात किया गया था। एनआईए अब जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण कर रही है, जिससे इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या था दिल्ली का वो खौफनाक मंजर?
गौरतलब है कि 10 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया था। इस आत्मघाती हमले में 11 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। हमले का मास्टरमाइंड उमर उन नबी विस्फोट के दौरान ही मारा गया था। जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) का हाथ था।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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