राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला : एमजी इंग्लिश मीडियम स्कूल के शिक्षकों को वापस मूल कैडर में जाने का अधिकार
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के रिवर्जन को लेकर एक बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक इंग्लिश मीडियम स्कूल से वापस अपने मूल हिंदी माध्यम स्कूल या पद पर जाना चाहता है, तो विभाग को राजस्थान सिविल सर्विसेज़ रूल्स, 2023 के नियम 13 के तहत उसके आवेदन पर विचार करना अनिवार्य है।
शिक्षक हितेश कुमार ने अधिवक्ता गुलाब सिंह नरुका द्वारा कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसकी नियुक्ति शुरू में सेकेंडरी एजुकेशन में टीचर लेवल द्वितीय के पद पर हुई थी। बाद में उनका चयन महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के लिए हुआ। दो साल वहां सेवा देने के बाद, शिक्षक ने अपनी मूल पोस्ट (टीचर ग्रेड-द्वितीय, एलिमेंट्री एजुकेशन, हिंदी) पर वापस जाने के लिए विभाग को रिप्रेजेंटेशन दिया था। न्यायालय में यह भी बताया कि याची हिंदी माध्यम के विज्ञान गणित विषय का होने के नाते उसे इंग्लिश माध्यम में पढ़ाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है जबकि स्कूल में इंग्लिश मीडियम के शिक्षक मौजूद होने एवं अधिशेष लिस्ट में नाम होने के बावजूद विभाग ने प्रार्थी को अधिशेष नहीं किया। इसके खिलाफ शिक्षक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती :
न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। राजस्थान सिविल सर्विसेज़ रूल्स, 2023 का नियम 13 स्पष्ट रूप से शिक्षकों के रिवर्जन का प्रावधान करता है। नियम के अनुसार कर्मचारियों को कुछ शर्तों के साथ रिवर्जन पाने का कानूनी अधिकार है। अगर कोई कर्मचारी रिवर्जन के लिए आवेदन करता है, तो अथॉरिटी की यह जिम्मेदारी है कि वह नियम 13 की प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए उस पर निर्णय ले व बताए गए नियम को पढऩे से यह साफ़ है कि इस नियम के तहत, इंग्लिश मीडियम स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों को वापसी का अधिकार उपलब्ध है, बेशक, कुछ शर्तों के साथ। इसलिए मौजूदा रिट याचिका को प्रतिवादियों को ऐसे निर्देश के साथ निपटाया जाता है। नतीजतन, याचिका में प्रतिवादियों को निर्देश देते हुए निस्तारण की जाती है कि वे 2023 के नियमों के नियम 13 के अनुसार याचिकाकर्ता के वापसी के प्रतिनिधित्व पर विचार करें और निर्णय लें।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
