Makar Sankranti 2026: एकादशी पर भूल से चावल खा लिया तो क्या होगा, जानिए दोष मुक्ति और पुण्यकाल
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल का सेवन वर्जित होता है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव या भूलवश लोग एकादशी की तिथि में चावल का सेवन कर लेते हैं। मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर षट्तिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में यह सवाल लोगों के मन में उठ रहा है कि अगर गलती से एकादशी पर चावल खा लिया जाए तो क्या करना चाहिए।
एकादशी पर हुई भूल के बाद क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं
दोष मुक्ति के लिए जगन्नाथ जी की प्रार्थना को माना जाता है प्रभावी
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में बताया गया है कि एकादशी पर चावल खाने से उत्पन्न दोष से मुक्ति के लिए भगवान जगन्नाथ की आराधना विशेष फल देती है। जगन्नाथ जी को अन्न ब्रह्म का स्वामी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उनके श्रीमुख के दर्शन कर या श्रद्धा भाव से प्रार्थना करने पर अन्न से जुड़ी गलतियों की क्षमा मिल जाती है। जो लोग दर्शन के लिए नहीं जा सकते वे घर पर ही श्रद्धा के साथ नाम स्मरण कर सकते हैं।
मकर संक्रांति 2026 का पुण्यकाल और महापुण्यकाल
पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 2026 पर पुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं महापुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय स्नान और दान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
षट्तिला एकादशी की तिथि और पारण का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार षट्तिला एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से हो चुकी है। इस तिथि का समापन 14 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। वहीं एकादशी व्रत का पारण 15 जनवरी को किया जाएगा। इस दिन नियम और संयम के साथ व्रत रखने को विशेष फलदायी माना गया है।
Disclaimer।
यह समाचार धार्मिक मान्यताओं और पंचांग की सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी व्रत पूजा या धार्मिक निर्णय से पहले अपनी परंपरा और आस्था का ध्यान रखें। Royal Bulletin इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
