हर्बल रंगों से मनाएं सुरक्षित होली, रासायनिक रंगों से रखें दूरी
मेरठ समाचार बुधवार, 4 मार्च, 2026
सावधान: रसायनों के शोर में खो न जाए होली की असली रंगत, प्राकृतिक रंगों से सजाएं खुशियों का आंगन
ये भी पढ़ें चंद्र ग्रहण: आज अयोध्या में रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन बंद, सूतक काल के दौरान बरतें ये सावधानियांमेरठ। बुरा न मानो होली है की गूंज के साथ आज पूरा जनपद रंगों के उल्लास में डूबा है। सुबह से ही गलियों और मोहल्लों में टोलियां निकलनी शुरू हो गई हैं और हवा में गुलाल उड़ने लगा है। आपसी द्वेष और मनमुटाव भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाने का यह पर्व प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है। हालांकि त्योहार के इस उत्साह के बीच विशेषज्ञों ने रासायनिक रंगों के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि होली का असली आनंद तभी है जब इसे सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से मनाया जाए।
बाजार में बिकने वाले चटकीले और गहरे रासायनिक रंग त्वचा के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकते हैं। इन रंगों में मौजूद हानिकारक तत्व न केवल त्वचा पर जलन पैदा करते हैं बल्कि कोमल त्वचा वाले बच्चों और महिलाओं के लिए गंभीर संक्रमण का कारण भी बन सकते हैं। चिकित्सकों का परामर्श है कि बाजारू रसायनों के जाल में फंसने से बेहतर है कि सादे पानी से होली खेली जाए। इससे कम से कम शरीर को रसायनों से होने वाली बड़ी हानि से बचाया जा सकता है।
प्राचीन समय में होली खेलने के लिए फूलों और प्राकृतिक अर्क का प्रयोग किया जाता था। पलाश के फूलों, हल्दी और चुकंदर जैसे प्राकृतिक उत्पादों से बने रंग न केवल सुरक्षित होते हैं बल्कि त्वचा को पोषण भी देते हैं। आज के समय में भी उच्च गुणवत्ता वाले हर्बल गुलाल बाजार में उपलब्ध हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल प्रमाणित हर्बल उत्पादों का ही चयन करें अथवा घर पर ही सुरक्षित रंग तैयार करें।
रंगों के इस महापर्व पर सामाजिक मर्यादाओं का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। हुड़दंग और जबरन रंग डालने जैसी प्रवृत्तियां त्योहार की गरिमा को कम करती हैं। विशेष रूप से महिलाओं के प्रति अशिष्ट व्यवहार और अभद्रता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। पुलिस प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि उत्साह के नाम पर कानून हाथ में लेने वालों और अशिष्ट आचरण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आज के दिन का संकल्प यही होना चाहिए कि हम रंगों के माध्यम से खुशियां बांटें और किसी भी ऐसी गलती से बचें जिससे उत्सव का रंग फीका पड़े या किसी को जीवन भर का दर्द मिले। सुरक्षित और मर्यादित होली ही वास्तव में रंगों के इस पर्व को सार्थक बनाती है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

टिप्पणियां