नवरात्रि व्रत का वास्तविक अर्थ: मां दुर्गा की शक्ति और ज्ञान का अन्वेषण

वर्ष में दो बार आने वाले ऋतु परिवर्तन के संधिकाल में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह समय केवल बाहरी अनुष्ठानों का नहीं बल्कि अपने भीतर छिपी अनंत शक्तियों के अनुसंधान और आत्म-मंथन का है।
विद्वानों और आध्यात्मिक चिंतकों का मानना है कि हम अक्सर परंपरा के वशीभूत होकर व्रत तो रख लेते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपी गहरी भावना और वास्तविक उद्देश्य पर मनन करना भूल जाते हैं। इन व्रतों का मूल उद्देश्य मनुष्य को अपनी आंतरिक ऊर्जा को पहचानने और उसे सही दिशा में मोड़ने के लिए प्रेरित करना है। यदि भीतर जाग्रत होने वाली इस शक्ति का सदुपयोग करना नहीं सीखा गया, तो यह ऊर्जा न तो मंगलदायिनी सिद्ध होगी और न ही ज्ञानवर्धक। शक्ति का अनियंत्रित या गलत दिशा में प्रवाह साधक के उत्थान के बजाय पतन का कारण बन सकता है।
वर्तमान समय में भौतिकता की चकाचौंध के बीच मां दुर्गा के वास्तविक स्वरूप को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यदि किसी व्यक्ति के जीवन का परम लक्ष्य केवल इंद्रिय सुख और सांसारिक वैभव तक ही सीमित है, तो उसने अभी तक मां के उस विराट स्वरूप का साक्षात्कार नहीं किया है। मां दुर्गा का वास्तविक और उच्चतम स्वरूप शुद्ध 'ज्ञान' है। यह वह प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।
अध्यात्म की गहराई में उतरने पर यह बोध होता है कि जिस अंतःकरण में यह ज्ञान स्थिर हो जाता है, उसी हृदय में 'बोधि' यानी आत्मज्ञान का उदय होता है। ऐसे प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए यह समस्त चराचर जगत उस आदि शक्ति का ही प्रतिबिंब बन जाता है। उसे सृष्टि के कण-कण और हर जीव में उसी महाशक्ति की उपस्थिति का आभास होने लगता है। अतः नवरात्रि का यह पावन समय स्वयं को भौतिकता से ऊपर उठाकर उस अखंड ज्ञान की प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त करता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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