ईद-उल-फितर का चांद नजर नहीं आया, देश में 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार को ईद-उल-फितर का चांद नजर नहीं आया है। वैसे भी मौसम खराब होने की वजह से चांद नजर आने की संभावनाएं कम हो गई थीं। इसके साथ ही देश के अन्य राज्यों से भी कहीं से चांद निकलने की सूचना नहीं मिली है, इसलिए शाही जामा मस्जिद के इमाम शाबान बुखारी ने मरकजी रुयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक के बाद यह ऐलान किया है कि शुक्रवार, 20 मार्च को रमजान का तीसवां रोजा रखा जाएगा और शनिवार, 21 मार्च को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा।
शाबान बुखारी ने बताया कि जामा मस्जिद में मगरिब की नमाज के बाद मरकजी रुयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक हुई है, जिसमें चांद देखने की कोशिश की गई लेकिन मौसम खराब होने की वजह से चांद दिखाई नहीं पड़ा। इसके बाद देश के अन्य राज्यों से भी टेलीफोन के माध्यम से संपर्क किया गया पर कहीं से भी चांद निकलने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कमेटी ने शनिवार, 21 मार्च को ईद मनाने का फैसला लिया है।
इसी तरह शाही मस्जिद फतेहपुरी के इमाम डॉ. मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने भी ईद-उल-फितर के चांद को लेकर ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि मस्जिद की रुयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में दिल्ली एनसीआर एवं अन्य राज्यों में कहीं पर भी ईद उल फित्र के चांद के निकलने की सूचना नहीं मिली है, इसलिए कमेटी ने शनिवार 21 मार्च को ईद मनाने का ऐलान किया है।
इमारत-ए-शरीया हिन्द की एक बैठक हजरत मौलाना जकावत हुसैन कासमी साहब नायब अमीर-ए-शरीअत, दिल्ली प्रदेश की अध्यक्षता में इमारत-ए-शरीया हिन्द के केंद्रीय कार्यालय नई दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित मस्जिद अब्दुल नबी में आयोजित की गई, जहां ईद के चांद को लेकर के पूरे देशभर से जानकारी एकत्र की गई, लेकिन कहीं से भी चांद के निकलने की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इमारत-ए-शरीया हिन्द ने मुसलमानों से कल रमजान का तीसवां रोजा रखने और 21 मार्च को ईद मनाने का ऐलान किया है।
मुत्तहिदा-रुयत-ए-हिलाल कमेटी ने भी आज एक बैठक का आयोजन किया जिसमें चांद देखने की कोशिश की गई मगर दिल्ली सहित देश के किसी भाग से चांद की सूचना नहीं मिली है, इसलिए कमेटी ने 21 मार्च को ईद मनाने का फैसला किया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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