मनुष्य वही जो कर सके दुखियों की सहायता और सामाजिक कर्तव्य निभा सके
कोई व्यक्ति कितना भी विद्वान, तपस्वी, ज्ञानी, ध्यानी और कुशल क्यों न हो, यदि वह अपने आसपास रहने वालों के दुःख में साथ न दे सके, रोते हुए को सांत्वना न दे सके, समर्थ होते हुए भी भूखे को भोजन और बीमार, लाचार व्यक्ति को औषधि या सेवा न दे सके, तो समझना चाहिए कि उसमें मानवीय मूल्यों का अभाव है। ऐसे व्यक्ति के ज्ञान, तप और व्रत का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता।
व्रत-उपवास, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान तभी सार्थक हैं जब उनमें करुणा और सेवा का भाव जुड़ा हो। यदि धनी, शक्तिशाली और समर्थ लोग—जिन पर ईश्वर की विशेष कृपा मानी जाती है—समाज के कमजोर और असहाय वर्ग की रक्षा का दायित्व नहीं निभाते, उन्हें अन्याय, हिंसा और दंभ से नहीं बचाते, तो समाज की संरचना ही कमजोर पड़ जाती है। सामाजिक कर्तव्यों की उपेक्षा अंततः पूरे समाज को विघटन की ओर ले जाती है।
धर्मग्रंथों में भी परदुःखकातरता को सर्वोच्च गुण माना गया है। एक कथानक के अनुसार, जब धर्मराज युधिष्ठिर को असत्य में सहयोग देने के कारण नरक के मार्ग से गुजरना पड़ा, तो वहां के निवासियों का करुण क्रंदन सुनकर उनका हृदय द्रवित हो गया। वे वहीं रुक गए क्योंकि उनकी उपस्थिति से पीड़ितों को शांति मिल रही थी। कहा जाता है कि वे तब तक वहां से नहीं हटे जब तक नरकवासियों को स्वर्ग जाने की अनुमति नहीं मिल गई।
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख को अपना समझकर उसे कम करने का प्रयास करना है। हमें अपने भीतर करुणा, संवेदना और सेवा का भाव जागृत करना चाहिए। दीन-दुखियों के आँसू पोंछना ही सच्ची साधना है और यही मनुष्य होने का वास्तविक प्रमाण भी।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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