बंदूक नहीं, कला का सहारा लिया... अशोक पंडित ने कश्मीरी फिल्म 'बट्ट कोच' की तारीफ की, दीं शुभकामनाएं

मुंबई। कश्मीरी पंडित और फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कश्मीरी भाषा में बनी फिल्म 'बट्ट कोच' की तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए फिल्म को भावनाओं से भरपूर, शक्तिशाली और दिल को छू लेने वाली बताया। अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर कैप्शन में लिखा, "यह फिल्म दर्शकों को पूरी तरह स्क्रीन से बांधे रखती है, सोचने पर मजबूर करती है और गहरा संदेश देती है।
वीडियो में अशोक पंडित ने कहा, “हम सब जानते हैं कि 1990 में कश्मीरी पंडितों का निष्कासन हुआ, उनका नरसंहार हुआ, उनकी जातीय सफाई हुई और पूरी कौम घरों से बेघर हो गई।” उन्होंने बताया कि फिल्म का नाम 'बट्ट कोच' है, जहां 'कोच' कश्मीरी पंडितों की गली को कहते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी अगली पीढ़ी ने माता-पिता की कहानियां सुनकर अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा। अशोक पंडित ने फिल्म के निर्देशकों सिद्धार्थ कौल और अंकित वली की खास तारीफ की।
उन्होंने कहा, “हमारी कम्युनिटी के ये दो लड़के सिद्धार्थ और अंकित ने सोचा कि हम अपनी पीड़ा को फिल्म के जरिए दुनिया के सामने लाएंगे। आज के जमाने में फिल्म बनाना और रिलीज करना बड़ी उपलब्धि है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने बंदूक नहीं उठाई, न कोई बुरी राह चुनी। उन्होंने कला का सहारा लिया और अपनी व्यथा को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।” उन्होंने प्रोड्यूसर विनायक के साहस और पैशन की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, “पैसे और फंड के बिना सपने पूरे नहीं होते। विनायक ने भरोसा जताया और फिल्म बनाई।” अशोक पंडित ने एम.के. रैना, कुसुम धर, अनिल कौल चिंगारी, कुसुम तिक्कू, साक्षी भट्ट, श्रीमे भट्ट, दिलीप पंडिता और अन्य कलाकारों के अभिनय की भी प्रशंसा की। उन्होंने फिल्म के संगीत की तारीफ करते हुए कहा कि सौरभ झाड़ू ने कश्मीरी लोक-संगीत की शैली में संगीत तैयार किया है, जो पंडित परिवार की भावनाओं को बखूबी पेश करता है। कैमरा वर्क, एडिटिंग (आकांक्षा झाड़ू), कॉस्ट्यूम्स और पोस्ट-प्रोडक्शन सब कुछ शानदार है। अशोक पंडित ने कैप्शन में लिखा, “पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।
उम्मीद है कि इस साल 'क्षेत्रीय फिल्म' श्रेणी के सभी पुरस्कार आप ही जीतेंगे। फिल्म ने वापस घाटी की यादों में ले जाकर भावुक कर दिया। यह फिल्म मानवता पर आधारित है। कम बजट में बनी यह छोटी-सी कश्मीरी फिल्म लोगों के सामने आई और अमिट छाप छोड़ गई।” अशोक पंडित ने पोस्ट के अंत में कहा, “यह फिल्म कश्मीरी पंडितों के लिए एक मील का पत्थर है। यह हमेशा याद रखी जाएगी।” उन्होंने सिद्धार्थ और अंकित को याद करते हुए कहा कि जब वे स्क्रिप्ट लेकर आए थे, उनकी आंखों में पैशन और ईमानदारी देखकर पता था कि फिल्म एक दिन रिलीज होगी।
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