पाकिस्तान: लश्कर-ए-तैयबा के किले 'मरकज तैयबा' में सेंध, हाई-रैंकिंग कमांडर बिलाल सल्फी की दिनदहाड़े हत्या
ईद की नमाज के बाद मुख्यालय के भीतर हुआ जानलेवा हमला, ताबड़तोड़ गोलियों और चाकुओं से गोदा

मुरीदके (पाकिस्तान)। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को शनिवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले मुख्यालय 'मरकज तैयबा' के भीतर संगठन के हाई-रैंकिंग कमांडर बिलाल आरिफ सल्फी की हत्या कर दी गई। ईद की नमाज खत्म होने के कुछ ही देर बाद हुए इस दुस्साहसिक हमले ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और आतंकी नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने मुरीदके स्थित मुख्यालय के भीतर सल्फी को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने सल्फी पर पहले ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फिर चाकुओं से वार कर उसकी मौत सुनिश्चित की। वीडियो में खून से लथपथ सल्फी जमीन पर पड़ा नजर आ रहा है, जबकि आसपास मौजूद लश्कर के सदस्य उसे उठाने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हमले के तुरंत बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया, लेकिन हमलावर सुरक्षा घेरे को तोड़कर फरार होने में कामयाब रहे।
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सूत्रों के अनुसार बिलाल आरिफ सल्फी साल 2005 से लश्कर ए तैयबा से जुड़ा हुआ था। वह संगठन के लिए फंड जुटाने का काम करता था, जिसका उपयोग हथियार और अन्य गतिविधियों में किया जाता था। वह मुरीदके की तैयबा कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहता था, जहां संगठन के अन्य सदस्य भी मौजूद रहते हैं। बिलाल आरिफ सल्फी लश्कर-ए-तैयबा का एक रणनीतिक स्तंभ माना जाता था। पाकिस्तान के युवाओं की पहचान करने और उन्हें आतंकी नेटवर्क में शामिल करने का प्रमुख चेहरा था। मुरीदके स्थित केंद्र से वह नए लड़ाकों को 'कश्मीर जिहाद' के नाम पर कट्टरपंथी बनाने और उन्हें वैचारिक प्रशिक्षण देने का जिम्मा संभालता था। उसे लश्कर की उस मशीनरी का अहम हिस्सा माना जाता था जो युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करती थी।
एजेंसियों की चुप्पी और बढ़ता तनाव
इस हाई-प्रोफाइल हत्या के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। मरकज तैयबा के भीतर घुसकर किए गए इस हमले को लश्कर के लिए एक बड़ी खुफिया विफलता माना जा रहा है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है, और न ही हमले के पीछे के असली मकसद का खुलासा हो पाया है। इस घटना के बाद से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आतंकी ठिकानों के आसपास तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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