फरसा वाले बाबा की मौत पर देवकीनंदन महाराज का बड़ा बयान: "यह संत की नहीं, सनातन की हत्या है"

मथुरा। मथुरा के प्रसिद्ध गौरक्षक फरसा वाले बाबा उर्फ संत चंद्रशेखर की मौत के बाद मथुरा में तनाव की स्थिति है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है। परिवार और आसपास के लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। घटना से कथावाचक देवकीनंदन महाराज भी दुखी हैं। कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने फरसा वाले बाबा की मौत को सनातन की हत्या बताया। उन्होंने कहा, "पहले मथुरा जैसे तीर्थ स्थल में गौ तस्करी, गौ हत्या जैसे कृत्य शर्मनाक घटनाएं होती थीं, लेकिन आज तो गो रक्षक को ही मार डाला।
ये भी पढ़ें एसपी ने शक्ति पीठ कालिकन धाम में पूजा करने के बाद किया प्रमुख मंदिरों और मेला स्थलों का भ्रमणयह घटना सोची समझी साजिश है या फिर आम घटना, इसके लिए पुलिस को तुरंत कार्रवाई करते हुए एक्शन लेने की जरूरत है। ईमानदारी से निष्पक्ष जांच करने की जरूरत है, जिससे कोई अन्य गौरक्षक शिकार न बने।" संत चंद्रशेखर के बड़े भाई केशव सिंह ने आईएएनएस को बताया कि काफी समय से वे गौ तस्करों के निशाने पर थे। उन्होंने बताया कि रात मोजे पहनकर वे गायों को बचाने के लिए चार लड़कों के साथ निकले थे और जब वे वाहन की जांच कर रहे थे, तब ट्रक ने पीछे से टक्कर मारी। पुलिस वाले भी मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
केशव सिंह का कहना है कि योगी सरकार को मामले में गंभीरता से कार्रवाई करते हुए गौ तस्करी को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके छोटे भाई 40 साल से गो सेवा में लगे थे। फरसा बाबा के साथ मौजूद चश्मदीद गवाह केवल कृष्ण भारद्वाज ने आईएएनएस को बताया कि बाबा ने रात 1 बजे के बाद गौ तस्करी की सूचना फोन के जरिए दी थी और बताया था कि वाहन में पशुधन हो सकता है। हम वहां पहुंच रहे थे, लेकिन 3 बजे के बाद किसी का फोन आता है कि बाबा का एक्सीडेंट हो गया है। वहां पहुंचने पर पता चला कि गौ-तस्कर भाग चुके हैं। इतनी जोरदार टक्कर मारी गई थी कि कि देखकर ही पता लगता है कि किसी ने बदला लेने के इरादे से यह किया है। प्रशासन सच छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से कड़ा विरोध किया है कि या तो हत्या करने वालों को मारा जाए, नहीं तो वे प्रदर्शन करेंगे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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