थकी आंखों के लिए वरदान है नेत्र-शक्ति-विकासक, समस्याएं दूर कर देता राहत
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर तनाव, थकान और एकाग्रता की कमी आम समस्या बन गई है। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय बताता है कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि हमारी इंद्रियों खासकर आंखों की शक्ति बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य से आयुष मंत्रालय आसान और प्रभावी योग अभ्यास नेत्र-शक्ति-विकासक के बारे में जानकारी देता है, जिसे रोजाना करने से आंखों की रोशनी में प्राकृतिक तरीके से सुधार, तनाव में कमी और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
एक्सपर्ट के अनुसार, नेत्र-शक्ति-विकासक की विधि आसान है। यह एक विशेष योग अभ्यास है, जिसमें आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, आंखों को आराम देने और दृष्टि केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाने के लिए कई आसान क्रियाएं शामिल हैं। यह विधि योग के सिद्धांतों पर आधारित है और बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से की जा सकती है। इसके मुख्य क्रियाओं में त्राटक, नेत्र घुमाव, पलक झपकाना और आंखें बंद करके आराम देना, दूर-नजदीक की वस्तुओं पर बारी-बारी फोकस करना और पामिंग यानी हथेलियों से आंखों को गर्माहट देकर ढकना शामिल हैं। इन क्रियाओं को सुबह खाली पेट या शाम को 10 से 15 मिनट तक नियमित रूप से करना चाहिए। नेत्र-शक्ति-विकासक के कई लाभ होते हैं।
इससे आंखों के तनाव और थकान कम होती है और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली आंखों की जलन, सूखापन और भारीपन में राहत मिलती है। एकाग्रता और फोकस बढ़ता है, दिमाग शांत होता है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता मजबूत होती है, जो छात्रों और ऑफिस जाने वालों के लिए बहुत फायदेमंद है। दृष्टि में प्राकृतिक तरीके से सुधार होता है। इसके नियमित अभ्यास से आंखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे दूर-नजदीक की चीजें स्पष्ट दिखती हैं और चश्मे की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, गंभीर समस्या में डॉक्टर से सलाह लें। आंखों का रक्त संचार बढ़ता है, आंखों को पोषण मिलता है और उम्र के साथ होने वाली कमजोरी धीमी पड़ती है। साथ ही मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा तनाव कम करता है, नींद में सुधार लाता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। आंखों की गंभीर बीमारी वाले लोगों को नेत्र चिकित्सक से परामर्श जरूर लेनी चाहिए।
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