लोकायुक्त ने भाजपा विधायक को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा..जानें क्या है यह पूरा मामला
बेंगलुरु। कर्नाटक लोकायुक्त ने गदग जिले के लक्ष्मेश्वर कस्बे में कथित रिश्वत मामले में शिरहट्टी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक चंद्रु लमानी को शनिवार को हिरासत में लिया। सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त की टीम ने विधायक को एक ठेकेदार से कथित तौर पर 5 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह रकम कथित रूप से बड़ी रिश्वत मांग का हिस्सा थी। इस कार्रवाई के दौरान विधायक के सरकारी निजी सहायक मंजुनाथ वाल्मीकि और निजी सहायक गुरु लमानी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक, विधायक पर आरोप है कि उन्होंने माइनर इरिगेशन विभाग के तहत एक ठेका आवंटित करने के बदले क्लास-1 ठेकेदार विजय पूजार से 11 लाख रुपये की मांग की थी। यह कथित रिश्वत सड़क किनारे रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य से जुड़ी बताई गई है। यह ट्रैप ऑपरेशन धारवाड़ लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धलिंगप्पा की निगरानी में अंजाम दिया गया। अधिकारियों ने जाल बिछाकर विधायक और उनके सहयोगियों को कथित तौर पर 5 लाख रुपये स्वीकार करते समय पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने जांच के तहत लक्ष्मेश्वर स्थित बालाजी अस्पताल में भी तलाशी ली, जो चंद्रु लमानी के स्वामित्व में बताया जा रहा है। मामले की आगे की जांच जारी है और अधिकारी कथित रिश्वत कांड से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2023 में कर्नाटक के पूर्व भाजपा विधायक मदल विरुपाक्षप्पा को भी रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया था।
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लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें दावणगेरे जिले के चन्नागिरी कस्बे में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने से पहले ट्रैक किया था। बताया गया था कि उन्होंने पुलिस से बचने की कोशिश की, लेकिन बेंगलुरु के पास एक टोल गेट पर उन्हें रोक लिया गया। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। विरुपाक्षप्पा को कर्नाटक स्टेट सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (केएसडीएल) से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था।
लोकायुक्त ने उन्हें तब बुक किया था, जब उनके बेटे को 40 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद की छापेमारी में उनके संजय नगर स्थित आवास से 6.1 करोड़ रुपये नकद और कार्यालय से 2.2 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। तलाशी के दौरान कुल 8.23 करोड़ रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोना-चांदी के आभूषण और कर्नाटक भर में भूमि में किए गए निवेश का भी खुलासा हुआ था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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