दिल्ली के अभिभावकों को बड़ी राहत: "1 अप्रैल से मनमानी फीस नहीं ले सकेंगे निजी स्कूल"—हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कहा है कि निजी स्कूल एक अप्रैल से अपने मन मुताबिक फीस नहीं वसूल सकते हैं। दिल्ली सरकार ने शुक्रवार काे दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि जब तक नयी फीस की मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं वसूल सकते। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि निजी स्कूलों के फीसों को रेगुलेट करने के लिए स्कूल स्तरीय कमेटियां गठित करने के लिए दिल्ली सरकार का नोटिफिकेशन छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के हक में है। कोर्ट ने निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अखिल सिब्बल से पूछा कि वे बताएं कि स्कूल फीसों को रेगुलेट करने के लिए स्कूल स्तरीय कमेटियां गठित क्यों नहीं करना चाहते हैं। तब सिब्बल ने कहा कि एक फरवरी का नोटिफिकेशन कानून सम्मत नहीं है क्योंकि इसमें कानून के प्रावधान के मुताबिक टाइमलाइन बदल दिया गया है। उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को फीसों रेगुलेट करने के लिए स्कूल स्तरीय कमेटियां गठित करने के लिए समय सीमा 20 फरवरी तक बढ़ाया था।
दिल्ली के निजी स्कूलों की ओर से दायर याचिका में दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के 24 दिसंबर, 2025 के नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई थी। इसी नोटिफिकेशन में ये आदेश दिया गया था कि निजी स्कूल 10 जनवरी तक स्कूल स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी का गठन करें। कमेटी में एक चेयरपर्सन, प्रिंसिपल, पांच अभिभावक, तीन शिक्षक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दिल्ली शिक्षा निदेशालय के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि ये नोटिफिकेशन कानून का उल्लंघन करता है। याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार ने कहा था कि ये पूरे तरीके से संवैधानिक है और इसका मकसद निजी स्कूलों काे मनमानी फीस वसूलने पर रोक लगाना है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि वो नोटिफिकेशन पर तो रोक नहीं लगाएगी, लेकिन वो इसे लागू करने की समय सीमा बढ़ा देगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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