पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर भाजपा और टीएमसी में घमासान..जानें क्या है पूरा विवाद
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर संवैधानिक गरिमा को लेकर जंग छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब गहराया जब टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा राष्ट्रपति के संदर्भ में की गई टिप्पणी को भाजपा ने 'आदिवासी विरोधी' और 'महिला विरोधी' मानसिकता का परिचायक बताया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक सार्वजनिक सभा या चर्चा के दौरान टीएमसी के एक नेता (अक्सर सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी द्वारा अखिल गिरी या अन्य नेताओं के पुराने/नये बयानों का संदर्भ दिया जाता है) ने राष्ट्रपति के पद या उनके व्यक्तित्व को लेकर ऐसी टिप्पणी की जिसे भाजपा ने 'अमर्यादित' माना। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी लगातार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी एक आदिवासी महिला का अपमान कर रही है।
भाजपा का आक्रामक रुख
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि टीएमसी के डीएनए में ही आदिवासियों का अपमान करना है। उन्होंने ममता बनर्जी से इस पर सार्वजनिक माफी की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के नेताओं को नियंत्रित करने में विफल रही हैं, जो बार-बार राष्ट्रपति मुर्मु को निशाना बनाते हैं।
टीएमसी की सफाई
टीएमसी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि पार्टी राष्ट्रपति के पद का सर्वोच्च सम्मान करती है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि भाजपा असल मुद्दों (जैसे मनरेगा फंड या बंगाल के बकाया पैसे) से ध्यान भटकाने के लिए पुराने बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।
इस विवाद के राजनीतिक मायने
पश्चिम बंगाल के जंगलमहल और उत्तरी बंगाल के इलाकों में आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। राष्ट्रपति मुर्मु के 'अपमान' को मुद्दा बनाकर भाजपा इन क्षेत्रों में टीएमसी को घेरना चाहती है। भाजपा इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़कर 'महिला कार्ड' खेल रही है, जो ममता बनर्जी का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। राजभवन (राज्यपाल) और राज्य सरकार के बीच पहले से चल रहे तनाव में यह विवाद घी का काम कर रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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