डिजिटल सुपरमार्केट में महिलाओं का सौदा: पिज्जा की तरह 'डिलीवर' हो रही लड़कियां, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
लंदन/नई दिल्ली। तकनीक की दुनिया ने जहां जीवन को सुगम बनाया है, वहीं इसके अंधेरे कोनों से एक ऐसी डरावनी हकीकत सामने आई है जिसने पूरी मानवता को झकझोर दिया है। 'इंडिपेंडेंट एंटी-स्लेवरी कमिश्नर (IASC)' की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट पर महिलाओं और मासूम बच्चियों का सौदा किसी 'पिज्जा' या साधारण 'प्रोडक्ट' की तरह किया जा रहा है। 'पिम्पिंग वेबसाइट्स' के नाम से चर्चित ये डिजिटल प्लेटफॉर्म आधुनिक गुलामी का सबसे बड़ा केंद्र बन गए हैं।
60 हजार से ज्यादा विज्ञापनों का खौफनाक जाल
कमिश्नर एलेनोर लियोन द्वारा की गई जांच में पाया गया कि ये वेबसाइट्स अपराधियों के लिए मुनाफे की खान साबित हो रही हैं। जांच के दौरान 12 प्रमुख वेबसाइट्स पर करीब 63,000 विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें से 10 में से 6 विज्ञापनों में सीधे तौर पर मानव तस्करी और यौन शोषण के पुख्ता संकेत मिले। रिपोर्ट के अनुसार, महज एक महीने के भीतर इन वेबसाइट्स पर 4 करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचे, जो इस अवैध धंधे की भयावहता को दर्शाता है। एक पीड़िता मिया डे फाओइट ने इसे 'आधुनिक गुलाम बाजार' करार दिया है, जहां ग्राहक उम्र और नस्ल के आधार पर महिलाओं का चुनाव करते हैं।
पीड़िताओं की रूह कंपा देने वाली दास्तां
इस दलदल से बचकर निकली महिलाओं की आपबीती व्यवस्था की विफलता बयां करती है। एक पीड़िता ने बताया कि उसने अपने शरीर पर पहचान के लिए टैटू बनवाया था ताकि यदि उसकी हत्या कर दी जाए, तो कम से कम उसके शव की शिनाख्त हो सके। वेबसाइट्स के जरिए संचालित इस धंधे में महिलाओं को इनकार करने पर बलात्कार और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं। अपराधी खुद महिलाओं के नाम पर ग्राहकों से चैट कर सौदा तय करते हैं और सारा मुनाफा खुद डकार जाते हैं, जबकि महिलाएं सिर्फ खौफ और सदमे में जीने को मजबूर रहती हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ब्रिटिश सरकार सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। संसद में नए कानून लाने की तैयारी है, जिससे अदालतों को इन 'पिम्पिंग वेबसाइट्स' को तत्काल सस्पेंड करने का अधिकार मिलेगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि टेक कंपनियों को किसी भी आपत्तिजनक विज्ञापन या बिना सहमति के साझा की गई तस्वीरों को 48 घंटे के भीतर हटाना होगा। साथ ही, इन वेबसाइट्स पर 'उम्र का सत्यापन' (Age Verification) अनिवार्य करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
सावधानी और जागरूकता की अपील
मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाली संस्था 'तारा' (TARA) का कहना है कि अपराधी अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते हैं। इंटरनेट पर 'एस्कॉर्ट सर्विस' या 'मसाज पार्लर' के नाम पर दिखने वाले संदिग्ध विज्ञापनों के पीछे अक्सर एक बड़ा संगठित अपराध छिपा होता है। विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे संदिग्ध विज्ञापनों के प्रति सजग रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल सुरक्षा एजेंसियों को दें।
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