एनसीबी ने पैन इंडिया डार्कनेट ड्रग नेटवर्क ‘टीम कल्कि’ का किया भंडाफोड़, एलएसडी व एमडीएमए सहित बड़ी खेप बरामद
नई दिल्ली। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में फैले डार्कनेट आधारित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क “टीम कल्कि” का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में एलएसडी, एमडीएमए (एक्स्टेसी) गोलियां, लिक्विड एमडीएमए सहित कई नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। एनसीबी ने रविवार को एक बयान जारी कर बताया कि यह नेटवर्क जनवरी 2025 से डार्कनेट प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप ‘सेशन’ के जरिए संचालित हो रहा था। पिछले तीन महीनों में प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली में अभियान चलाकर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 2,338 एलएसडी ब्लॉटर्स, 160 एमडीएमए (एक्स्टेसी) गोलियां जिनका वजन 77.517 ग्राम है, 73.612 ग्राम चरस, 3.642 ग्राम एम्फेटामाइन तथा 3.6 किलोग्राम लिक्विड एमडीएमए बरामद किया। यह बरामदगी 13 घरेलू पार्सलों और नीदरलैंड से आए दो पार्सलों से की गई, जो इस नेटवर्क से जुड़े थे।
जांच में पता चला है कि डार्कनेट विक्रेता “टीम कल्कि” को अनुराग ठाकुर और उसका सहयोगी विकास राठी संचालित कर रहे थे। दोनों आरोपित आदतन अपराधी हैं और पहले भी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। विकास राठी को इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज चरस तस्करी के मामले में तिहाड़ जेल में रखा गया था, जबकि अनुराग ठाकुर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज मेथाम्फेटामाइन तस्करी मामले में जेल में था। दोनों एक ही समय तिहाड़ जेल में बंद थे, जहां उनकी पहचान हुई और बाद में उन्होंने मिलकर “टीम कल्कि” नाम से डार्कनेट ड्रग नेटवर्क शुरू किया।
ये भी पढ़ें घुसपैठियों पर सख्त अमित शाह, कहा, "केदारनाथ से कन्याकुमारी तक, एक-एक को चुनकर भारत से बाहर करेंगे'प्रारंभ में आरोपित डार्क वेब फोरम “ड्रेड” पर सक्रिय थे, जहां उनके विक्रेता खाते को चार-स्टार रेटिंग मिली हुई थी, जो बड़ी संख्या में सफल ऑर्डर पूरे होने का संकेत देती है। इसके बाद उन्होंने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप ‘सेशन’ के माध्यम से भी ऑर्डर लेने और आपूर्ति करने की व्यवस्था शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क देशभर में फैला हुआ था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपितों द्वारा एलएसडी और एमडीएमए जैसे मादक पदार्थ नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी में स्थित अंतरराष्ट्रीय डार्कनेट विक्रेताओं से मंगाए जाते थे।
ग्राहकों से ऑर्डर मिलने के बाद एक आरोपित ऑर्डर की जानकारी अपने सहयोगी को देता था, जो मादक पदार्थों की पैकिंग और पार्सल भेजने का काम करता था। इसके बाद कूरियर और डाक सेवाओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में ग्राहकों तक पार्सल भेजे जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित “डेड ड्रॉप” नामक तकनीक का उपयोग करते थे, जिसमें नशीले पदार्थों से भरे पार्सल सीधे ग्राहक को देने के बजाय पहले से तय स्थानों पर रख दिए जाते थे और बाद में ग्राहकों को स्थान की जानकारी देकर उन्हें वहां से पार्सल लेने के लिए कहा जाता था। हालांकि यह तरीका दिल्ली के सीमित इलाकों में ही इस्तेमाल किया जाता था, जबकि देशभर में डिलीवरी के लिए स्पीड पोस्ट और अन्य कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता था।
एनसीबी के अनुसार इस नेटवर्क की तरफ से जनवरी 2025 से अब तक एक हजार से अधिक पार्सल देशभर में भेजे जाने की आशंका है। जांच के दौरान आरोपितों से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं और इस ऑपरेशन से जुड़ा एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी चिन्हित किया गया है। आरोपित भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लेते थे, जिसमें मोनेरो और यूएसडीटी जैसी डिजिटल मुद्राओं का इस्तेमाल किया जाता था। इन पैसों को कई मध्यवर्ती वॉलेट के माध्यम से घुमाकर अंततः कोल्ड वॉलेट में संग्रहित किया जाता था, जिससे लेन-देन की पहचान करना कठिन हो सके।
एनसीबी इस मामले में अन्य सहयोगियों की पहचान, वित्तीय लेनदेन का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा करने के लिए जांच जारी रखे हुए है। एजेंसी ने कहा कि “टीम कल्कि” के पूरे नेटवर्क और उसके संचालन तंत्र को ध्वस्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह कार्रवाई डार्कनेट आधारित मादक पदार्थ तस्करी और सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क के खिलाफ एनसीबी की देशव्यापी मुहिम का हिस्सा है। इससे पहले भी एजेंसी ने ‘ऑपरेशन केटामेलन’ (2025) और ‘ऑपरेशन जांबादा’ (2023) जैसे अभियानों के जरिए संगठित ड्रग तस्करी गिरोहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी।
एनसीबी ने कहा कि भारत की मादक पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी ने आम लोगों से भी अपील की है कि मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन या तस्करी से संबंधित जानकारी ‘मानस’- राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 1933) पर साझा करें, जहां सूचनादाताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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