मुजफ्फरनगर में 'ट्रिपल इंजन' सरकार के दावों का निकला दम; 'रॉयल बुलेटिन' के सर्वे में 49 हजार से ज़्यादा लोगों ने खोली नगरपालिका के विकास की पोल
जवाब दो संजीव जी, कपिल जी, मीनाक्षी जी! इंदौर बनाने के वादे के बीच मुजफ्फरनगर बना 'नर्क'; अगले साल होने हैं चुनाव, अब तो कुछ करो !
मुजफ्फरनगर। देश में 2014 और उत्तर प्रदेश में 2017 से भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार है। मुजफ्फरनगर शहर में भी पिछले दस साल से कपिल देव अग्रवाल विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में काबिज हैं, पिछले नगरपालिका चुनाव के दौरान तत्कालीन सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने नगर की जनता से अपील की थी कि "शहर में भी ट्रिपल इंजन की सरकार बना दो, हम शहर का कायाकल्प कर देंगे, इसी सुर में सुर मिलाते हुए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने वादा किया था कि "मुझे जिता दो, शहर को इंदौर बना दूंगी"。 लेकिन आज की तस्वीरें कुछ और ही गवाही दे रही हैं।
अगले साल फिर से नगर पालिका और विधानसभा (कपिल देव अग्रवाल) के चुनाव होने हैं। ऐसे में 'रॉयल बुलेटिन' ने रविवार को शहर की जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की, तो केवल कुछ घंटों में ही शहर की जनता ने अपने गुस्से का इजहार कर दिया। मात्र कुछ घंटों में 49275 से भी ज़्यादा लोगों ने इस रिपोर्ट को देखा और अपनी व्यथा साझा की। सर्वे में 42 % नए दर्शकों का जुड़ना यह साबित करता है कि जनता अब विज्ञापनों और वादों वाली चमक-धमक से ऊब चुकी है और धरातल पर जवाब मांग रही है।
400 नामों की 'चार्जशीट': जब जनता बनी खुद रिपोर्टर
आमतौर पर लोग सरकारी विभागों के खिलाफ बोलने से कतराते हैं, लेकिन 'रॉयल बुलेटिन' के मंच पर 400 से ज़्यादा जागरूक नागरिकों ने अपने नाम, वार्ड और मोबाइल नंबर के साथ प्रशासन को चुनौती दी है। इन नामों की सूची यह बताने के लिए काफी है कि भ्रष्टाचार इस शहर के नागरिकों के लिए अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।
जनता की आवाज़: प्रमुख शिकायतें और नाम
सर्वे के दौरान नागरिकों ने पालिका प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है:
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सय्यद मोहम्मद (वार्ड 45): "कादिर राणा की कोठी से शिव मंदिर और जैनबया स्कूल तक की सड़क की पैमाइश अनिवार्य है। अवैध निर्माणों की जांच हो, जिससे रास्ता संकरा हो गया है।"
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अक्षय वर्मा (तीखा प्रहार): "भ्रष्टाचार से घिरी इस बोर्ड में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं। निकृष्ट कर्मचारी और लापरवाह सभासदों के कारण मुजफ्फरनगर में पहली बार इतना निम्न स्तर का बोर्ड मिला है।"
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सोनिया शर्मा (भोपा रोड): "विश्वकर्मा चौक से आगे शराब के ठेके के पास आधा रोड ई-रिक्शा और अवैध पार्किंग से ढका रहता है, जिससे भयंकर जाम लगता है।"
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रविंदर जैन और विपिन हिंदुत्व (वार्ड 17): "यहाँ सफाई व्यवस्था अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी संतोषजनक है।"
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कुलदीप कुमार गुप्ता: "कामकाज में पहले से सुधार हुआ है और स्थितियां बेहतर हुई हैं।"
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नवीन आचार्य और संजीव कुमार भी मानते है कि "चेयरपर्सन श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप ने बेहतर काम किया है जो निरंतर जारी है।"
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जबकि एडवोकेट अमरदीप काकरान कहते है कि "सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। कर्मचारी फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं, गलियों में गंदगी का अंबार है।"
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नीशू गौसेवक का तो साफ़ कहना है कि "नगर पालिका में अंधेर नगरी, चौपट राजा है। पालिका अध्यक्ष की तो चल ही नहीं रही और अधिशासी अधिकारी पालिका चला रही हैं!"
इन वार्डों में 'नर्क' जैसे हालात
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वार्ड 43 (रामपुरम/बच्चन सिंह कॉलोनी): यहाँ पंकज चौहान ने 4 बार जनसुनवाई पोर्टल पर गुहार लगाई, लेकिन नाले का पानी सड़कों पर तालाब बना है। संदीप शर्मा, सविता वर्मा 'गज़ल' और अभिषेक मित्तल ने भी बताया कि कर्मचारी गलियों में नहीं आते।
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वार्ड 29 (रघु विहार/सुजडू): सोनू त्यागी, शाकिर राज और ज़ाहिद राणा के अनुसार स्ट्रीट लाइटें ठीक नहीं होतीं और सफाई के नाम पर ₹100 की अवैध वसूली की जा रही है।
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वार्ड 35 (सुभाष नगर): सोनू मलिक, अंजू बालियान और शादाब हसन ने आवारा कुत्तों और जलभराव की गंभीर समस्या उठाई है।
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वार्ड 30 (गांधी कॉलोनी): नीरज शर्मा, उत्तम रावत, विद्या भूषण बक्शी और कृष्ण वाधवा ने वीआईपी रास्तों पर बदहाली और बंदरों के आतंक की शिकायत की है।
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वार्ड 38: डॉ. अर्शद राजपूत के अनुसार निवासी खुद नालियां साफ करने को मजबूर हैं।
भ्रष्टाचार और 'घटिया माल' का खेल
अमित छाबड़ा, सुरेंद्र मान और अमित सैनी ने आरोप लगाया कि सफाई केवल सभासदों या प्रभावशाली लोगों के क्षेत्रों में होती है। कपिल चौधरी ने निर्माण कार्यों में 'घटिया माल' के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। एडवोकेट राजीव और नवीन निर्भीक वर्मा ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर ₹300 तक की वसूली पर तीखा प्रहार किया।
कुत्तों का आतंक: "कुत्तों वाली गली" की दास्तां
संजय गर्ग ने व्यथा सुनाई कि कुत्तों ने गलियों को गंदा कर दिया है। अब उनकी गली का नाम ही "कुत्तों वाली गली" पड़ गया है और लोग डंडा लेकर निकलने को मजबूर हैं। वहीं मंडी समिति रोड पर 'गोयल होलसेल' के अनुसार कूड़े के ढेर से व्यापार प्रभावित हो रहा है।
इन नागरिकों ने भी खोला मोर्चा (वार्डवार प्रमुख नाम):
सय्यद मोहम्मद (वार्ड 45), अक्षय वर्मा, सोनिया शर्मा, रविंदर जैन (वार्ड 17), मनोज राठी, डॉ. अर्शद राजपूत (वार्ड 38), अब्दुल रहमान, नवीन आचार्य, संजीव कुमार, विपिन हिंदुत्व, राज तेज्ञान, कपिल चौधरी, टोनी सोनी, कुलदीप कुमार गुप्ता, शुभम गर्ग, सुमित कुमार, एडवोकेट अमरदीप काकरान, राजन वर्मा, सौरभ मित्तल (वार्ड 39), अकुल अग्रवाल, नीशू गौसेवक, पंकज मलिक, संजय गर्ग, पंकज चौहान (वार्ड 43), सविता वर्मा 'गज़ल', सुरेंद्र मान।
वार्डवार सक्रिय नागरिक:
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वार्ड 27 व 29: शोएब कुरैशी, शाकिर राज, ज़ाहिद राणा, सोनू त्यागी, आलम राणा, मोइन गौरी, इ. वाजिद अली।
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वार्ड 43 व 45: संदीप शर्मा, अभिषेक मित्तल, सय्यद मोहम्मद, पंकज चौहान, मोहम्मद कादिर।
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वार्ड 30 व 35: नीरज शर्मा, उत्तम रावत, विद्या भूषण बक्शी, कृष्ण वाधवा, सोनू मलिक, अंजू बालियान, शादाब हसन, सोनू भाटिया।
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वार्ड 15, 16 व 17: रोहित कुमार, विशाल शर्मा, रविंदर जैन, विपिन हिंदुत्व, रोनी ठाकुर।
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वार्ड 10, 13 व 21: रोनशा खटियान, प्रभाकर मौर्य, गौरव कश्यप, हर्षित चंदेल, तेजपाल सिंह।
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वार्ड 1, 5 व 8: निकेत चहल, भाई शाहरुख, विनय त्यागी, आरिफ ज़ैदी।
प्रबुद्ध वर्ग व अन्य प्रमुख नाम: एडवोकेट राजीव, नवीन निर्भीक वर्मा, तुषार माहेश्वरी, मुस्तकीम आर अहमद, ईश्वर सिंह, जुनैद मिर्ज़ा, नूर फुरकान अंसारी, रामेश्वर, सैयद उम्मे सलमा, निर्मल शर्मा, अमित मैनी, अर्शद उमर, आदिल सैफी, सीमा अवस्थी, मो. इस्तेकार राजपूत, आयशा जमाल, विक्कू विराट, शेख फरीद, शमा अंसारी, राहुल कुमार प्रजापति, प्रवीण चौधरी, इ. देशवाल लटियान मनु, मनीष जैन, कीरत सिंह, सिराज खान, कोकिल मलिक, वरुण भंडारी, विनोद सैनी, यामिनी भाटिया, साजिद कसार, बाबू सिंह, मंजू बालियान, अशोक कुमार, संदीप पाल, मोदियश वर्मा, मनोज कुमार, आशीष राठी, एजाज़ अंसारी, अजीत शर्मा, आयुषी वरुण जैन, मो. फैयाज, अर्जुन टैंक, मो. फरमान, मोहम्मद आरिफ, संदीप दिव्यांग, अरविंद कुमार, प्रदीप कुमार कश्यप, अतर सिंह बालियान, सुशील कुमार, सागर भारद्वाज, मीनू जैन, राजीव कुमार शर्मा, निर्भय खोखर, राजेश मोघा, धर्मेंद्र बिटोलिया, पूजा गुप्ता, विपिन गुप्ता, हरेंद्र बालियान, कुंवर अहमद गौड़, अग्रवाल अरुण, जोगेंद्र सिंह हुड्डा, साकिब फरीदी, नवनिश गोयल, प्रमोद राय, इमरान अली, नीरज गुप्ता, मोहिनी भाटिया, तनवीर अहमद, आनंद पाल, गोल्डी विवेक सबरवाल, शिवम शर्मा, अंकित मलिक, शरद पाल, विष्णु कुमार अनेजा, सचिन कुमार सिंघल, सुमित खेड़ा, रविंदर कुमार, अनिल तायल, सीमा संजय त्यागी, प्रमोद कुमार, आरिफ सलमानी, सुशील अरोड़ा, अश्वनी लोहट, मनोरमा त्यागी, मनीष बाथला, रोहित मुखिया, इ. दिग्विजय पी. माथुर, सुमित कश्यप, रेखा गोयल, संजीव कुमार (विचारक), पंडित धीरेंद्र शुक्ल धीरज, राहुल वर्मा, सुनील चौहान, रोहित वत्स, गोल्डी अरोड़ा, राजीव ठाकुर, शादाब सिद्दीकी, नौशाद अल्वी, इमरान अंसारी, नितिन सहावली, विनय तोमर, बब्बल मनोज कुमार, चौधरी आदित्य राठी, विक्रांत धीमान, निमेष सिंह, गीता चाहर, ध्रुव मित्तल, मो. आमिर आलम, अनुसूया बंसलियाल, गौरव सिंघल, विकास कुमार (जिला अध्यक्ष), अंकित वधवा, दीपक शर्मा, अरिश अंसारी, अंकित चौधरी, रीमा गुप्ता, साहिल खान, वसीम मलिक, राहुल जैन, कामयाब खान, रघुराज सिंह, सन्नवर खान, तरुण सिंह, आबिद सैफी, गंगादास गंगा, नावेद सिद्दीकी, मुकीम यामीन, फरमान राणा, दीपक जैन, शोएब अंसारी गुड्डू, गौरव शॉट, दिलशाद खान, चौधरी अंकुर राठी, दीपक कुमार, संजय बालियान, अमित वर्मा, कपिल यादव, इरम काजमी, मनोज शर्मा, जॉनी हिंदू, शकील त्यागी, दीपक कुमार चंदेल, मोंटी राठी, विशाल गोयल, कृष्णा कश्यप, कल्पना सिंघवाल, ज़री ज़ैदी, अमित गोयल, राजीव मलिक, ममता रानी, बंटी कुमार, इ. इज़हार हयात, राहुल बालियान, हिमांशु शर्मा, मयंक शर्मा, सोनू शर्मा, पं. विशाल शर्मा, मनीष गुप्ता, भोला सोनकर, मज़हर अब्बास ज़ैदी, मोहसीन कुरैशी, दीपक राणा, मोहित कुमार, शान सिद्दीकी, विनोद कुमार, जितेंद्र कुमार पाल, पुनीत वर्मा, अनुज राठी, सुबाष बालियान, सचिन देव, रचित देव, अहसान साहब, शादाब राणा, राजेश कुमार सैनी, इफ्तखार हुसैन, प्रीत कौर, शिव वर्मा, जावेद रंगरेज़, राहुल कौशिक, साधना विश्नोई, तशीम अहमद, शिखा गर्ग, कौशल शर्मा, पुष्पा सैनी, गुंजन कालरा चावला, विशाल कश्यप, आशुतोष कुमार, हनी सौरभ बंगा, रोहित सोनकर, मुकुल त्यागी, वैभव वर्मा, विमल त्यागी, शिवम सोनी, नदीम राणा, शलभ गुप्ता, पूजा अनिल आंबेडकर, डीके दीपू, तुषार शर्मा, मधुसूदन त्यागी, अंकित धीमान, दिव्य प्रकाश, सिकंदर अली।
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विज्ञापन की चमक-धमक से मुजफ्फरनगर की बदहाली छिपने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन 400 शिकायतों पर कार्रवाई करते हैं या फिर हमेशा की तरह कुंभकरणी नींद में सोए रहते हैं, जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होता, 'रॉयल बुलेटिन' जनता के ये सवाल अफसरों और नेताओं से लगातार पूछता रहेगा। आपको ये सर्वे कैसा लगा ? , कमेंट में अपनी राय ज़रूर दीजिये और अगले सर्वे में भी शामिल रहिये। रोज पूछेंगे हम आपकी राय और मांगेंगे जिम्मेदारों से जवाब।
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