कांग्रेस की महिला सांसदों ने ओम बिरला को पत्र लिखकर विरोध जताया..
नई दिल्ली। कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर उन पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने और महिला सांसदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया है कि इंडी गठबंधन के आठ सांसदों को सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर निलंबित कर दिया गया जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अश्लील और अभद्र तरीके से बोलने की अनुमति दी गई।
महिला सांसदों की ओर से लिखे गए इस पत्र में अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है, “जब हम आपसे मिले, तो हमने न्याय और उपरोक्त भाजपा सांसद के निलंबन की मांग की, आपने स्वीकार किया कि एक गंभीर गलती हुई है और हमसे शाम 4 बजे वापस आने को कहा। आपसे दोबारा मिलने पर, आपने कहा कि आप इस मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आप ऐसे मामलों में अब निर्णय लेने वाले नहीं हैं। इससे सदन के अध्यक्ष के रूप में आपके अधिकार पर गंभीर सवाल उठते हैं।”
ये भी पढ़ें यूएस-इंडिया ट्रेड डील से भारत का 2030 तक 250 बिलियन डॉलर का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट का टारगेट बढ़ाआगे लिखा गया है कि शाम 5 बजे, पारंपरिक प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए, प्रधानमंत्री को लोकसभा में बोलने का कार्यक्रम तय किया गया। इंडी गठबंधन के सभी सदस्य विरोध में खड़े हो गए और प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए। अगले दिन, प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के दबाव में आकर, आपने एक बयान जारी किया जिसमें कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए गए। जबकि हमारा विरोध लगातार शांतिपूर्ण, दृढ़ और पूरी तरह से लोकतांत्रिक मानदंडों के भीतर रहा है। हममें से अधिकांश लोग सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं और कई पहली पीढ़ी के राजनेता हैं। हमारी यात्रा दशकों की कड़ी मेहनत से बनी है, जिसमें हमने लोगों के बीच काम किया है, विरोध और भेदभाव का सामना किया है। हमारी ईमानदारी पर सवाल उठाना हर उस महिला पर एक गंभीर हमला है जो गरिमा और साहस के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाती है।
कांग्रेस की महिला सांसदों ने पत्र में लिखा है कि हमें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हमने लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और उनसे जवाबदेही की मांग की है। सदन से उनकी गैरमौजूदगी हमारी किसी धमकी की वजह से नहीं थी, यह डर का काम था। उनमें विपक्ष का सामना करने की हिम्मत नहीं थी। हमारा मानना है कि पारदर्शिता ही संसद के अध्यक्ष के पद की गरिमा और इस सदन की विश्वसनीयता को बहाल करने का एकमात्र तरीका है।
पत्र में लिखा गया है कि हमें आपके पद और आपके प्रति पूरा सम्मान है। हालांकि, यह बिल्कुल साफ है कि आप सत्ताधारी पार्टी के लगातार दबाव में हैं। हम आपसे एक बार फिर आग्रह करते हैं कि आप लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में काम करें। हम इस प्रयास में आपके साथ खड़े रहेंगे और आपका पूरे दिल से समर्थन करेंगे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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