यूपी में धुंध का कहर: 18 साल बाद मार्च में घनी धुंध, 2 दिन में मौसम और बिगड़ सकता है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ और देवरिया सहित दस शहरों में इन दिनों घने कोहरे और धुंध की चादर लिपटी हुई है जिसके चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अट्ठारह साल बाद मार्च के महीने में धुंध के ऐसे हालात बने हैं। इससे पहले वर्ष दो हजार आठ में इस तरह की मौसमी स्थिति देखी गई थी। धुंध के कारण दृश्यता महज तीस मीटर तक सिमट जाने से यातायात पर गहरा असर पड़ा है और बुधवार को लखनऊ में कम दृश्यता के चलते छह उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
सड़कों पर छाई इस धुंध के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चार सड़क हादसों की खबर है जिनमें नौ गाड़ियां आपस में टकरा गईं। इन दुर्घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई है जबकि तीस लोग घायल हुए हैं। एक ओर जहां धुंध ने सुबह की रफ्तार थाम दी है वहीं दूसरी ओर दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा जहां पारा अड़तीस दशमलव छह डिग्री तक पहुंच गया जबकि आगरा और झांसी में भी तापमान छत्तीस डिग्री के पार दर्ज किया गया।
लखनऊ के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा में नमी और धूल के कणों के फंसने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है जिसे ग्लोबल वार्मिंग के संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि चौदह मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जिसके प्रभाव से पंद्रह से सत्रह मार्च के बीच तराई और पूर्वांचल के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान तीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है जिससे आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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