यूपी में रसोई गैस के लिए हाहाकार: गैस एजेंसियों पर उमड़ी भीड़, 4-5 दिन की वेटिंग से जनता परेशान
लखनऊ/कानपुर/गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई का बजट ही नहीं, अब रसोई का प्रबंधन भी मुश्किल हो गया है। प्रदेश के कई बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत ने हाहाकार मचा दिया है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 5 बजे से ही खाली सिलेंडरों के साथ लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
बुकिंग के 5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं
आम तौर पर गैस बुकिंग के 24 से 48 घंटों के भीतर सिलेंडर घर पहुंच जाता है, लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके उलट है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि रिफिल बुकिंग के 4 से 5 दिन बीत जाने के बाद भी 'आउट ऑफ डिलीवरी' का मैसेज नहीं आता। परेशान होकर जब लोग सीधे गैस एजेंसी पहुंच रहे हैं, तो वहां उन्हें 'स्टॉक खत्म' होने की सूचना दी जा रही है या लंबी लाइन में लगने को कहा जा रहा है।
किल्लत के पीछे के 3 बड़े कारण
विशेषज्ञों और एजेंसी संचालकों ने इस संकट के पीछे निम्नलिखित कारणों की ओर इशारा किया है। मथुरा, कानपुर और वाराणसी के पास स्थित कुछ बॉटलिंग प्लांट्स में लोडिंग और मेंटेनेंस के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। प्रदेश में शादियों के सीजन के चलते कमर्शियल और घरेलू गैस की मांग में अचानक 20-30% का इजाफा हुआ है।
रिफाइनरी से आने वाले टैंकरों की संख्या में कमी और परिवहन संबंधी बाधाओं के कारण गैस गोदामों तक समय पर नहीं पहुंच रही है।
अधिकारियों का बयान: "पैनिक बुकिंग न करें"
बढ़ते विरोध को देखते हुए आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों ने मोर्चा संभाला है। अधिकारियों का कहना है:
"प्रदेश में गैस की कोई स्थाई कमी नहीं है। कुछ लॉजिस्टिक कारणों से डिलीवरी में 2-3 दिन की देरी हो रही है। हम अतिरिक्त शिफ्ट में काम करके बैकपैक क्लियर कर रहे हैं। उपभोक्ताओं से अपील है कि वे 'पैनिक बुकिंग' न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। अगले 48 से 72 घंटों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।"
कालाबाजारी की आशंका
संकट के बीच कुछ इलाकों से घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं। आरोप है कि एजेंसियां अपने खास लोगों या कमर्शियल उपयोग (होटल/ढाबों) के लिए बैक-डोर से सिलेंडर सप्लाई कर रही हैं, जिससे आम घरेलू उपभोक्ता कतार में ही रह जाता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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