मशरक में बंदर ने तीन दिनों में 60 से ज्यादा लोगों को काटा
सारण। मशरक नगर पंचायत क्षेत्र इन दिनों एक आक्रामक बंदर के खौफ के साये में है। पुराने रेलवे स्टेशन से लेकर मशरक जंक्शन तक इस बंदर ने ऐसा उत्पात मचाया है कि राहगीरों का सड़क पर निकलना दूभर हो गया है। पिछले 72 घंटों के भीतर इस बंदर ने पांच दर्जन से अधिक लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया है, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बंदर इतना शातिर है कि वह छतों, पेड़ों और दुकानों के पीछे घात लगाकर बैठता है और अचानक राहगीरों पर कूद पड़ता है। घायलों में महिलाएं, बच्चे और स्थानीय दुकानदार शामिल हैं। दहशत का आलम यह है कि स्टेशन रोड के दुकानदारों ने अपनी दुकानें आधी झुका रखी हैं और लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर निकलने को मजबूर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक के डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि अब तक बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचे हैं। सभी को एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिया गया है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग अकेले बाहर न निकलें और बंदर को बिल्कुल न उकसाएं। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बाद भी अब तक बंदर को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों ने मांग की है कि वन विभाग तत्काल पिंजरे के साथ टीम भेजे, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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