लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीजेपी में अंदरूनी कलह और सियासी उठापटक चर्चा में है। हाल ही में चरखारी से विधायक ब्रजभूषण राजपूत के खिलाफ नोटिस जारी होने की खबर सामने आई थी, लेकिन विधायक खुद इसे पूरी तरह झूठा और भ्रामक बता चुके हैं।
पहले लखनऊ मुख्यालय के कुछ सूत्रों ने दावा किया था कि यह नोटिस मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के रास्ते रोकने और असहज स्थिति पैदा करने के आरोप में भेजा गया है, लेकिन राजपूत ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी नोटिस के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने इसे पार्टी को बदनाम करने की साजिश बताया।
पार्टी संगठन ने भी इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए किसी पुष्टि से इंकार कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अंदरूनी मतभेद और तेज होने की चर्चा बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रार आगामी संगठनात्मक चुनावों पर असर डाल सकती है और बीजेपी के भीतर आपसी तालमेल पर सवाल खड़े कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को यूपी बीजेपी के अंदरूनी ड्रामे के रूप में देख रहे हैं और पार्टी की प्रतिक्रिया, कलह के परिणाम और आगामी चुनावों पर इसके प्रभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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