राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा हटाए गए
लखनऊ । अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों के बाद शासन ने बड़ा निर्णय लिया है। कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा को पद से हटाते हुए उन्हें महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमई), लखनऊ कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित घोष के स्तर से जारी आदेश के अनुसार, डॉ. सत्यजीत वर्मा के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच प्रचलित होने के दृष्टिगत अंतिम निर्णय आने तक उन्हें लखनऊ कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इस बावत कॉलेज के छह विभागाध्यक्षों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर प्राचार्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्यों व साक्ष्यों की जानकारी दी गई थी। आरोपों में खरीद-फरोख्त में अनियमितता, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, मशीनों को ठप कर निजी व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा एक ही अधिकारी/शिक्षक को अनेक प्रमुख दायित्व सौंपे जाने जैसी बातें शामिल बताई गईं थी।
ये भी पढ़ें डीजीपी राजीव कृष्ण का संदेश: सुरक्षित और शांतिपूर्ण होली के लिए यूपी पुलिस पूरी तरह मुस्तैदप्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने कॉलेज पहुंचकर संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए तथा जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। वहीं, लोकायुक्त स्तर पर भी प्रकरण की जांच के निर्देश की सूचना है। इधर, कॉलेज में शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए शासन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज में तैनात कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया को राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज अयोध्या का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह अतिरिक्त दायित्व होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतन/भत्ता देय नहीं होगा।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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