अनामिका जैन अंबर ने यूजीसी कानून को बताया एकतरफा, कहा- सच की सुनवाई जरूरी
मेरठ। प्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका अनामिका जैन अंबर ने यूजीसी कानून पर अपनी राय रखते हुए कहा कि कोई भी कानून तभी न्यायपूर्ण माना जा सकता है, जब उसमें दोनों पक्षों को बराबरी से सुना जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर किसी एक पक्ष की सुनवाई ही न हो और दूसरे पक्ष की बात पहले से ही मान ली जाए, तो इसे न्याय नहीं कहा जा सकता।
कवयित्री ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग के साथ अन्याय करना सही नहीं है। अनामिका जैन ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के खिलाफ बोलना नहीं है। उन्होंने कहा कि ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों को भी न्याय मिलना चाहिए और मिलना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी मामले में शिकायत या एफआईआर दर्ज होती है, तो उसमें सभी पक्षों की सुनवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "अगर सच को सामने आने का मौका ही नहीं दिया जाएगा, तो यह पहले से तय हो जाएगा कि गलती किसकी है। ऐसे में न्याय की भावना ही खत्म हो जाती है।" अनामिका जैन अंबर ने बताया कि इसी कारण उन्होंने यूजीसी के इस कानून का विरोध किया है। उन्होंने इसे एकतरफा कानून बताते हुए कहा कि जब सच की सुनवाई नहीं होती, तो वह व्यवस्था न्याय नहीं, बल्कि केवल फैसला सुनाने की प्रक्रिया बन जाती है।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru

टिप्पणियां