मेरठ में सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल पर 'कब्जे' की साजिश? सचिव की बेटी ने डीएम से मांगी सुरक्षा, फर्जी डीड का लगाया आरोप
मेरठ (Meerut): लोहियानगर स्थित सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के मालिकाना हक को लेकर छिड़ा विवाद अब सड़कों से होता हुआ जिलाधिकारी (DM) कार्यालय तक पहुँच गया है। स्कूल के सचिव अनुज शर्मा की बेटी मानवी शर्मा ने मंगलवार को डीएम को ज्ञापन सौंपकर अपने परिवार की जान को खतरा बताया और विपक्षी गुट पर स्कूल की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।
फर्जी डीड और राजनीतिक दबाव के गंभीर आरोप
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विवाद की जड़: शिकायतकर्ता का कहना है कि जब ट्रस्ट की कोई संपत्ति या कार्यालय आगरा में है ही नहीं, तो वहां डीड कैसे रजिस्टर हुई?
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जेल और मुक़दमे: आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर अनुज शर्मा पर लोहियानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया, जिसके बाद 18 जनवरी को उन्हें जेल भेज दिया गया।
कोर्ट के आदेश की अवहेलना और गुंडागर्दी
शिकायतकर्ता ने बताया कि आगरा की अदालत (सिविल जज सीनियर डिवीजन) ने 5 जनवरी को इस मामले में स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया था। इसके बावजूद, सोमवार शाम स्कूल के बाहर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर विवाद हुआ। मानवी का आरोप है कि 35 अज्ञात लोगों के साथ विपक्षी गुट स्कूल पर अवैध कब्जा करना चाहता है, जिससे वहां पढ़ रहे बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा खतरे में है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
नवविवाहिता मानवी शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके पिता को साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने डीएम से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और स्कूल को अवैध कब्जे से बचाकर उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। वहीं, दूसरी ओर गिरीश शर्मा पक्ष ने इन सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है।
कानूनी पेंच: क्या कहती है आगरा की 'कथित' फर्जी डीड?
किसी भी ट्रस्ट या प्रॉपर्टी के मामले में 'क्षेत्राधिकार' (Jurisdiction) सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में तीन बड़े कानूनी सवाल खड़े होते हैं:
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रजिस्ट्रेशन का अधिकार: यदि 'सत्यकाम एजुकेशन ट्रस्ट' मेरठ में पंजीकृत है और उसकी संपत्तियां भी मेरठ में हैं, तो आगरा में उसकी नई डीड पंजीकृत होना प्रथम दृष्टया संदिग्ध लगता है। रजिस्ट्रेशन एक्ट के अनुसार, डीड वहीं रजिस्टर होनी चाहिए जहाँ प्रॉपर्टी स्थित हो या जहाँ मुख्य कार्यालय हो।
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सिविल कोर्ट का स्टे (Stay Order): अगर आगरा की अदालत ने 5 जनवरी को स्थगन आदेश (Stay) दिया है, तो उस आदेश के प्रभावी रहते हुए स्कूल के प्रबंधन या मालिकाना हक में कोई भी बदलाव 'न्यायालय की अवमानना' (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है।
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सचिव की गिरफ्तारी और 'ड्रेस कोड' का प्रभाव: सचिव अनुज शर्मा की गिरफ्तारी के बाद यदि विपक्षी पक्ष स्कूल पर भौतिक कब्जा (Physical Possession) करने का प्रयास करता है, तो यह 'ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ' (कानूनी प्रक्रिया) का उल्लंघन है। बिना कोर्ट के आदेश के किसी को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जा सकता।
इस पूरे विवाद को समझने के लिए इन प्रमुख तारीखों और घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है:
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मूल आधार: अनुज शर्मा 'सत्यकाम एजुकेशन ट्रस्ट' के फाउंडिंग ट्रस्टी और मैनेजर के रूप में वर्षों से मेरठ के लोहियानगर स्थित स्कूल का संचालन कर रहे हैं।
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विवाद की शुरुआत (कथित फर्जीवाड़ा): विपक्षी पक्ष (गिरीश शर्मा व अन्य) द्वारा आगरा में ट्रस्ट की एक नई डीड पंजीकृत कराई गई। अनुज शर्मा पक्ष का दावा है कि जब ट्रस्ट का आगरा से कोई लेना-देना नहीं है, तो यह डीड पूरी तरह फर्जी है।
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5 जनवरी 2026 (अदालती हस्तक्षेप): अनुज शर्मा ने आगरा की सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) में वाद दायर किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस डीड और संबंधित बदलावों पर स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया।
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जनवरी मध्य (पुलिसिया कार्रवाई): आरोप है कि अदालती स्टे के बावजूद विपक्षी पक्ष ने राजनीतिक दबाव बनाया और लोहियानगर थाने में अनुज शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
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18 जनवरी 2026 (गिरफ्तारी): लोहियानगर पुलिस ने सचिव अनुज शर्मा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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19 जनवरी 2026 (टकराव): स्कूल के बाहर दोनों पक्ष (अनुज शर्मा के समर्थक और गिरीश शर्मा पक्ष) आमने-सामने आ गए। स्कूल पर कब्जे के प्रयास को लेकर जमकर हंगामा हुआ।
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20 जनवरी 2026 (प्रशासनिक गुहार): अनुज शर्मा की बेटी मानवी शर्मा ने मेरठ जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर सुरक्षा की मांग की और विपक्षी गुट पर 35 अज्ञात लोगों के साथ स्कूल हड़पने का आरोप लगाया।
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